नई दिल्ली। साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली आ मैथिली लोक रंग (मैलोरंग) केर संयुक्त तत्वावधानमे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालयक अंतर्मुख सभागारमे ‘मैथिली रंगमंच आंदोलन’ विषय पर राष्ट्रीय परिसंवादक आयोजन कएल गेल। एहि अवसर पर मैथिली भाषा-साहित्य आ रंगमंचसँ जुड़ल प्रतिष्ठित विद्वान, रंगकर्मी, लेखक आ शोधकर्तासभ उपस्थित छलाह।
मुख्य वक्ता के रूप मे अपन विचार रखैत प्रख्यात नाटककार, कवि आ भाषाविद् प्रो. उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’ कहलनि जे मैथिली रंगमंच आंदोलनक इतिहास बहुत दीर्घ नहि रहल अछि, मुदा स्वतंत्र भारतमे एकटा सतत आ जीवंत परंपरा रूपमे एकर विकास भेल अछि। हुनक अनुसार अन्य भाषासभक समान मैथिली रंगमंचक विकासमे अनुवादित नाटकक संग-संग मौलिक नाट्य लेखन सेहो महत्वपूर्ण भूमिका निभौने अछि। ओ कहलनि जे मैथिली मे ‘धूर्तसमागम’, ‘मणिमंजरी’ आ ‘गोरक्षविजय’ जकां महत्वपूर्ण मौलिक नाटक पहिने सँ उपलब्ध रहल अछि।
साहित्य अकादेमी आ मैलोरंगक संयुक्त आयोजनमे विद्वान, रंगकर्मी आ शोधकर्तासभक सहभागिता; मैथिली रंगमंचक इतिहास, वर्तमान आ चुनौतीसभ पर गहन विमर्श
मैलोरंगक निर्देशक डॉ. प्रकाश झा अध्यक्षीय संबोधन मे युवा रंगकर्मी कें व्यापक साहित्य अध्ययनक आवश्यकता पर जोर दैत कहलनि जे अध्ययनक अभाव मे अभिनय आ रंगमंचक संग न्याय करब कठिन अछि। ओ दिल्ली-एनसीआर मे मैलोरंग आ एकर प्रेरणा सँ सक्रिय भेल विभिन्न रंग संस्थासभक गतिविधिसभ पर सेहो प्रकाश देलनि।
बीज वक्तव्य प्रस्तुत करैत प्रदीप बिहारी कहलनि जे विभिन्न चरण सँ गुजरैत आइ मैथिली रंगमंचक परिदृश्य अत्यन्त समृद्ध भेल अछि। ओ मिथिलाक शहर सँ लऽ कए ग्रामीण क्षेत्रधरि सक्रिय रंगकर्म आ एकर समक्ष उपस्थित चुनौतीसभ पर विस्तारसँ चर्चा कएलनि। संगहि, समाज सँ रंगकर्मीसभ कें प्रोत्साहित करबाक आ कलाकार सभक लेल सम्मान-पुरस्कारक व्यवस्था करबाक आग्रह सेहो कएलनि।
नमोनारायण मिश्र कोलकाता मे मैथिली रंगमंचक विकास मे योगदान देनिहार संस्था आ रंगकर्मीसभक भूमिका पर प्रकाश देलनि। किसलय कृष्ण मिथिला आ नेपाल मे संचालित मैथिली रंगमंचक गतिविधि पर आधारित शोधपरक आलेख प्रस्तुत कएलनि।
मैथिली रंगमंचक वरिष्ठ अभिनेत्री प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’ पटना केंद्रित रंग आंदोलन, विभिन्न रंग संस्था आ हुनकर योगदानक विस्तृत चर्चा कएलनि। ओ कहलनि जे प्रारंभिक समय मे महिला कलाकारक अभाव छल, मुदा समाज मे बढ़ल जागरूकताक परिणामस्वरूप आइ मैथिली रंगमंच मे बेसी संख्या मे महिला अभिनेत्री आ निर्देशिकासभ सक्रिय छथि।
परिसंवादक दोसर सत्र मे युवा लेखक अरुणाभ सौरभ मैथिली रंगमंच आंदोलन पर वैश्विक रंगमंचक प्रभाव विषयक शोधपरक आलेख प्रस्तुत कएलनि आ विभिन्न नाट्य शैलिसभ पर विचार रखलनि। संजीव सिन्हा दिल्लीक रंगकर्मक संदर्भमे प्रेक्षकक दृष्टि सँ मैथिली नाटकक सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश देलनि।
दोसर सत्रक अध्यक्षता प्रो. देवशंकर नवीन कएलनि। ओ अपन अध्यक्षीय वक्तव्यमे आशा व्यक्त कएलनि जे मैथिली रंगमंच आंदोलन मिथिलाक समाज आ संस्कृतिक समृद्ध करैत आगाँ सेहो सकारात्मक भूमिका निभबैत रहत। हुनकर अनुसार साहित्यक मूल उद्देश्य मात्र मनोरंजन नहि, बल्कि समाजमे सकारात्मक परिवर्तन आनब रहल अछि।
कार्यक्रमक आरम्भमे साहित्य अकादेमीक उप सचिव एन. सुरेश बाबु अकादेमीक सचिव डॉ. वरुण गुलाटीक ओरसँ सभ आमंत्रित विद्वान, प्रतिभागी आ श्रोतासभक स्वागत कएलनि। सम्पूर्ण परिसंवादक दौरान सभागार दर्शक सँ खचाखच भरल रहल। एहि अवसर पर मैथिलीक अनेक लेखक, कवि, आलोचक आ साहित्यप्रेमी उपस्थित छलाह।
उद्घाटन सत्रक संचालन नाटककार रौशन झा आ दोसर सत्रक संचालन नाट्यालोचक संतोषी कुमार कएलनि। कार्यक्रमक समापन धन्यवाद ज्ञापनक संग नीतीश कुमार झा द्वारा कएल गेल।
