स्वादक संग परंपरा के धरोहरि : मिथिला के ‘बीरा’ साग, जे बरखभरि रखैत अछि स्वाद लाजवाब


मौसम कोनो होई, मुदा मिथिला के रसोई सँ सागक सुगंध नहि जाए—बीरा अछि पूर्वजक अनमोल खाद्य विरासत।

दरभंगा। मिथिलांचलक खान-पान अपन विशिष्ट स्वाद आ पारंपरिक व्यंजनक लेल देश-दुनिया मे प्रसिद्ध अछि। एतय साग-सब्जी के अनेक प्रकारक व्यंजन बनाओल जाइत अछि। सरसों, बथुआ, चना, पालक आ आन मौसमी साग मिथिला केर भोजनक अभिन्न हिस्सा रहल अछि। मुदा मौसम बदलला पर एहि सागसभक उपलब्धता समाप्त भऽ जाइत अछि। एहन स्थिति मे मिथिलाक गृहणीसभ हजारो साल सँ अपने एकटा अनुपम परंपरा के जीवंत रखने छथि—‘बीरा’।
बीरा मूल रूप सँ साग के संरक्षित कए बरखभरि उपयोग करबाक एक पारंपरिक तरीका अछि। फ्रिज आ आधुनिक भंडारण सुविधाक अभाव मे पुरान समय मे घरक महिलासभ साग के सुखा कए अथवा विशेष मसाला मे तैयार कए सुरक्षित राखैत छलीह। बरसात अथवा बेमौसम मे जखन ताजा साग उपलब्ध नहि होइत छल, तखन ई बीरा भोजनक स्वाद बढ़ाबैत छल।

कि अछि बीरा?
बीरा मूलतः सुखाओल अथवा विशेष विधि सँ तैयार कएल साग होइत अछि, जे दीर्घ समय धरि सुरक्षित रहैत अछि। मिथिलाक ग्रामीण क्षेत्र मे आइयो अनेक घर मे एहि परंपराक पालन कएल जाइत अछि। स्वादक संग-संग ई खाद्य संरक्षण केर उत्कृष्ट देसी उदाहरण सेहो मानल जाइत अछि।

कोना बनैत अछि बीरा?
बीरा बनेबाक लेल सर्वप्रथम मनपसंद साग, जेना बथुआ, सरसों अथवा चनाक साग, लेल जाइत अछि। अकरा हल्लुक फ्राई कए अथवा रौद मे सुखा कए सुरक्षित राखल जाइत अछि। एकर बाद सरसों, लहसुन आ काली मिर्चक पेस्ट तैयार कएल जाइत अछि। कड़ाही मे सरसों के तेल गर्म क’ एहि पेस्ट के भूनल जाइत अछि। सुगंध आबि गेला पर हल्दी, लाल मिर्च, नमक आ बारीक काटल टमाटर मिला कए मसाला तैयार कएल जाइत अछि। मसाला सँ तेल अलग होमय लगैत अछि तखन आवश्यकतानुसार पानि दऽ ग्रेवी बनाओल जाइत अछि। पानि खौलला पर फ्राई अथवा सुखाओल बीरा एहि मे मिला देल जाइत अछि आ लगभग पाँच मिनट धरि पकाओल जाइत अछि। एहि तरहें मिथिलाक पारंपरिक बीरा तैयार भऽ जाइत अछि।

भोजनक स्वाद बढ़ाबय वाला व्यंजन
गरम भातक संग बीराक स्वाद विशेष रूप सँ पसंद कएल जाइत अछि। रोटी, पराठा आ लिट्टीक संग सेहो ई ओतबे स्वादिष्ट लागैत अछि। मसाला केर तीखापन, सागक प्राकृतिक स्वाद आ माटिक सोंधी गमक एहि व्यंजन कें विशिष्ट बनबैत अछि।
बीरा मात्र एकटा व्यंजन नहि, बल्कि खान-पानक ओ परंपरा अछि जे पूर्वजक बुद्धिमत्ता आ खाद्य संरक्षणक लोकज्ञानक परिचय दैत अछि। जखन मौसम मे साग प्रचुर मात्रामे उपलब्ध हो, तखन बीरा बना क’ राखल जा सकैत अछि, जाहि सँ बरखभरि मिथिलाक पारंपरिक स्वादक आनंद लेल जा सकैत अछि।

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