होम लोन चुकाबएला पर बैंक नहि राखि सकत मूल कागज! इलाहाबाद हाईकोर्टक सख्त आदेश, घर मालिक सभ लेल पैघ राहत

नई दिल्ली। अपन घरक सपना पूरा करबाक लेल लाखो लोक बैंक सँ होम लोन लैत छथि। मुदा कतेको बेर देखल जाइत अछि जे लोनक पूरा रकम आ ब्याज चुकाबएला के बादो बैंक संपत्तिक मूल संपत्ति के मूल कागज घुरेबई मे आनाकानी करैत अछि। एनाहि एक महत्वपूर्ण मामला पर सुनबाई करैत इलाहाबाद हाईकोर्ट घर मालिक सभक हित मे महत्वपूर्ण फैसला सुनौने अछि।
अदालत स्पष्ट कहलनि जे जँ ग्राहक बैंकक समस्त बकाया राशि जमा कऽ देने छथि आ बैंक ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ जारी कऽ देने अछि, तँ ओकर बाद बैंक के संपत्तिक मूल कागज रोकि रखबाक कोनो वैधानिक आधार नहि बचैत अछि। बैंककेँ दस्तावेज ग्राहककेँ लौटेबाक होयत।
गाजियाबाद निवासी सीमा जैन साल 2002 मे एकटा मकान खरीदने रहथि आ नगर निगमक अभिलेख मे संपत्ति अपन नाम पर दर्ज करा लेने रहथि। मकान खरीदलाक लगभग दस बरखक बाद, 2012 मे बैंक हुनका जानकारी देलक जे ई मकान पहिनेसँ बंधक छल।
बैंकक अनुसार, मकानक पूर्व मालिक पाँच लाख रुपयाक लोन मे गारंटर छलाह। समयक संग ब्याज जुड़ैत-जुड़ैत बकाया राशि लगभग 22 लाख रुपया धरि पहुँचि गेल। बाद मे समझौता भेल आ सीमा जैन बैंक कें 5.5 लाख रुपया भुगतान कऽ देलनि। बैंक राशि स्वीकार करैत हुनका नो ड्यूज सर्टिफिकेट सेहो जारी कऽ देलक।
मुदा, एकर बादो बैंक संपत्तिक मूल दस्तावेज घुराबई सँ मना कऽ देलक। एहि कारण सीमा जैन न्याय लेल अदालतक शरण लेलनि।

ई मामला न्यायमूर्ति अजीत कुमार आ न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्लाक खंडपीठक समक्ष सुनल गेल। अदालत कहलक जे बैंक कखनो संपत्तिक हस्तांतरण कें चुनौती नहि देलक। एहि संपत्ति सऽ संबंधित कोनो सिविल अथवा आपराधिक मामला सेहो लंबित नहि छल। कोर्ट ईहो मानलक जे मूल ऋणी आ गारंटर दुनू लापता छथि आ बैंक समझौताक आधार पर राशि स्वीकार कऽ चुकल अछि।
अदालत स्पष्ट टिप्पणी करैत कहलक जे जखन बैंक समझौता राशि स्वीकार कऽ लेने अछि आ नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी कऽ देने अछि, तँ दस्तावेज रोकि रखबाक कोनो औचित्य नहि रहि जाइत अछि।
एहि संग हाईकोर्ट बैंक ऑफ इंडिया कें आदेश देलक जे दू सप्ताहक भीतर संपत्ति केर समस्त मूल दस्तावेज सीमा जैनकेँ सौंपल जाए।
भारतीय रिजर्व बैंक सेहो एहि विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कऽ चुकल अछि। आरबीआई के नियम अनुसार, जखन ग्राहक अपन लोनक संपूर्ण भुगतान कऽ दैत छथि, तँ बैंक अथवा वित्तीय संस्थान कें 30 दिनक भीतर मूल दस्तावेज वापस करबाक होइत अछि।
जँ बैंक एहि मे अनावश्यक देरी करैत अछि, तँ ग्राहक क्षतिपूर्तिक दावो कऽ सकैत छथि।
हालहि मे मुंबईक एक अदालत एकटा बैंकक विरुद्ध एफआईआर दर्ज करबाक आदेश देने छल, किएक तँ बैंक लोन पूरा चुकाबएला के बादो ग्राहकक मूल दस्तावेज वापस नहि कएलक। अदालत एहि व्यवहार के आपराधिक विश्वासघात केर श्रेणी मे मानलक।
इलाहाबाद हाईकोर्टक ई निर्णय ओहि सभ लोक लेल बहुत महत्वपूर्ण मानल जा रहल अछि, जे अपन संपत्ति बेचय चाहैत छथि, नव लोन लेबाक योजना बना रहल छथि अथवा पारिवारिक जरूरत लेल मूल दस्तावेजक आवश्यकता महसूस करैत छथि।
अक्सर बैंकक देरी के कारण ग्राहक कें आर्थिक नुकसानक संग मानसिक तनाव सेहो झेलऽ पड़ैत अछि। एहन परिस्थिति मे हाईकोर्टक ई फैसला ग्राहकक अधिकार कें मजबूत करैत अछि आ बैंक सभ कें स्पष्ट संदेश दैत अछि जे लोन चुकाबएला के बाद मूल दस्तावेज रोकि राखनाय कानून सम्मत नहि अछि।
इलाहाबाद हाईकोर्टक ई फैसला लाखो होम लोनधारक लेल पैघ राहत आ बैंकिंग जवाबदेही केर मजबूत उदाहरण मानल जा रहल अछि।

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