सीसीटीवी सँ बेसी खतरनाक बनि रहल अछि वाई-फाई राउटर

नई दिल्ली। एखन धरि लोक सीसीटीवी कैमरा सँ जासूसी के डर से आशंकित रहैत छलाह, मुदा आब एक नबका रिसर्च मे एकटा एहन तकनीकी के प्रति चेतावनी देल गेल अछि जे सामान्य वाई-फाई राउटर कें सेहो खतरनाक सर्विलांस टूल मे बदलि सकैत अछि। जर्मनी के कार्ल्सरुहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KIT) केर रिसर्चरसभ ‘BFId’ नामक नव वाई-फाई अटैक तकनीकक खुलासा केलथि अछि, जे बिना स्मार्टफोन या कनेक्टेड डिवाइस के सेहो लोकक पहचान क’ सकैत अछि।
रिसर्चरक दावा अछि जे एहि तकनीक के माध्यम सँ वाई-फाई राउटर मात्र इंटरनेट देबाक मशीन नहि, बल्कि लोकसभ पर नजरि रखबाक माध्यम सेहो बनि सकैत अछि।

रिसर्चक अनुसार, जखन कोनो व्यक्ति वाई-फाई रेंज मे अबैत अछि, त’ ओकर शरीरक बनावट आ चलबाक तरीका वाई-फाई रेडियो तरंग मे बहुत सूक्ष्म बदलाव उत्पन्न करैत अछि। मशीन लर्निंग मॉडल एहि बदलाव कें पकड़ि लैत अछि आ शरीर सँ निकलल रेडियो पैटर्नक आधार पर व्यक्ति कें चिन्ह सकैत अछि।
वैज्ञानिकसभक कहब अछि जे एहि तकनीक मे 99.5 प्रतिशत धरि सटीकता भेटल अछि। माने, भले ही अहाँ के हाथ मे फोन नहि हो, तइयो सिस्टम अहाँ कें चिन्ह सकैत अछि।

रिसर्च मे शामिल वैज्ञानिक जूलियन टोड्ट चेतावनी दैत कहलनि जे ई तकनीक भविष्यमे सब वाई-फाई राउटर कें सर्विलांस डिवाइस मे बदलि सकैत अछि।
वैज्ञानिकसभ उदाहरण दैत कहलनि जे जँ अहाँ रोज कोनो कैफे, दुकान या सार्वजनिक ठाम सँ गुजरैत छी जतय फ्री वाई-फाई उपलब्ध अछि, त’ अहाँ के फोन बिना जानकारी के स्वत: ओ नेटवर्क सँ बैकग्राउंड मे कनेक्शन बना सकैत अछि। एहि माध्यम सँ ओहिठामक सिस्टम अहाँक आवाजाही ट्रैक क’ सकैत अछि आ दोबारा गुजरला पर तुरंत चिन्ह सकैत अछि।

रिसर्चरसभक अनुसार BFId Attack “Beamforming Feedback Information (BFI)” पर आधारित अछि। ई फीचर WiFi 5 स्टैंडर्ड मे जोड़ल गेल छल, जाहि सँ राउटर कनेक्टेड डिवाइस सँ सिग्नल फीडबैक प्राप्त क’ सकय।
समस्या ई अछि जे ई सिग्नल एन्क्रिप्टेड नहि होइत अछि। अर्थात, आसपास मौजूद सामान्य वाई-फाई डिवाइस सेहो एहि सिग्नल कें चुपचाप रिकॉर्ड कए सकैत अछि। बाद मे मशीन लर्निंग केर मददि सँ एहि डेटा कें विश्लेषण कए लोकसभक “रेडियो इमेज” तैयार कएल जा सकैत अछि।

रिसर्चरसभ एहि तकनीकी के परीक्षण 197 लोक पर कएलनि। अध्ययन मे दावा कएल गेल जे सिस्टम 99.5 प्रतिशत सटीकता सँ लोकसभकें पहचान करए मे सफल रहल।
यद्यपि, कोनो व्यक्ति केर वास्तविक नाम या निजी जानकारी जोड़बाक लेल अतिरिक्त डेटा जरूरी होइत अछि। वैज्ञानिकसभक अनुसार ट्रैकिंग डेटा कें स्मार्टफोन या डिवाइस सँ जुड़ल पुरान जानकारीक संग मिला क’ कोनो व्यक्ति केर पूरा पहचान पता लगाओल जा सकैत अछि।

रिसर्चरसभ चेतावनी देने छथि जे स्मार्टफोन बंद कए देला के बादो अहाँ ट्रैक होए सँ नहि बचि सकैत छी। सीसीटीवी कैमरा या ‘चेहरा पहचान’ (Facial Recognition) सिस्टम के विपरीत वाई-फाई नेटवर्क पहिने सँ घर, ऑफिस, एयरपोर्ट, कैफे आ सार्वजनिक स्थान सभ मे मौजूद अछि।
वैज्ञानिकसभक कहब अछि जे भविष्य मे ई तकनीकी एहन “Silent Surveillance Infrastructure” बना सकैत अछि जे बिना कोनो संदेहक लगातार लोकसभ पर नजरि राखत।
रिसर्चरसभ आब IEEE 802.11bf WiFi Standard मे मजबूत Privacy Protection आ Security Features जोड़बाक मांग क’ रहल छथि, ताकि एहि तकनीकक दुरुपयोग रोकल जा सकए।

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