एक्के रूटक किराया 8 हजार आ 18 हजार किएक? सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार सँ माँगल जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट शुक्रदिन एयरलाइन कंपनी सभ द्वारा टिकटक मनमाना आ अत्यधिक मूल्य वसूली पर गम्भीर चिंता व्यक्त करैत केंद्र सरकार केँ यात्री सभ पर पड़ि रहल आर्थिक बोझ कम करबाक उपाय खोजबाक निर्देश देलक। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ आ न्यायमूर्ति संदीप मेहता केर पीठ एक्के दिन एक्के रूट पर किराया मे भारी अंतर पर सवाल उठबैत पूछलक जे जखन एक एयरलाइन इकोनॉमी सीट लेल 8 हजार रुपैया वसूल करैत अछि, तखन दोसर एयरलाइन 18 हजार रुपैया किएक चार्ज करैत अछि?

सुनवाईक दौरान न्यायाधीश सभ स्पष्ट कहलनि जे हवाई किराया निर्धारण मे “किछु तर्कसंगतता होबाक चाही”। ई टिप्पणी ओहि समय आयल जखन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत केँ जानकारी देलनि जे 2024 मे पारित नव विमानन कानून लागू भऽ चुकल अछि, मुदा ओकर विस्तृत नियमावली पर एखनहुँ विचार-विमर्श चलि रहल अछि। हुनका कहलनि जे सरकार एहि समस्या केँ स्वीकार करैत अछि आ निष्पक्ष रूप सँ समाधान खोजबाक दिशा मे विचार कऽ रहल अछि।

हवाई किराया मे पारदर्शिता लेल दायर भेल याचिका

ई मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर याचिका सँ जुड़ल अछि। याचिका मे हवाई किराया मे पारदर्शिता सुनिश्चित करबाक संग-संग अचानक बढ़ल किराया आ अतिरिक्त शुल्क पर रोक लगाबय लेल स्वतंत्र नियामक संस्था गठित करबाक मांग कएल गेल अछि। याचिकाकर्ताक पक्ष रखैत वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र श्रीवास्तव अदालत मे तर्क देलनि जे यद्यपि 1937 केर विमान अधिनियम अंतर्गत नियम मौजूद अछि, मुदा ओकर प्रभावी क्रियान्वयन नहि भऽ रहल अछि। हुनका बतौलनि जे नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) केँ अनुचित किराया पर हस्तक्षेप करबाक अधिकार अछि, मुदा एखन धरि एहि विषय मे कोनो ठोस निर्देश जारी नहि कएल गेल अछि।

नव विमानन नियम तैयार भऽ रहल अछि

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत केँ बतौलनि जे पुरान नियम एखनहुँ वैध अछि, मुदा भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 केर तहत नव दिशानिर्देश तैयार कएल जा रहल अछि। सुप्रीम कोर्ट पीठ याचिकाकर्ता केँ केंद्र सरकारक हलफनामा पर जवाब दाखिल करबाक निर्देश देलक आ अगिला सुनवाई 13 जुलाई लेल निर्धारित कएलक।

यात्री सभक बीच बढ़ि रहल अछि चिंता

हालक समय मे हवाई यात्रा करनिहार यात्री सभक बीच लगातार बदलैत आ अत्यधिक किराया चिंता केर विषय बनल अछि। विशेष रूप सँ त्योहार, छुट्टीक मौसम आ आपातकालीन यात्रा दौरान टिकटक दाम मे अचानक भारी वृद्धि देखल जाइत अछि। उपभोक्ता अधिकारक पक्षधर सभ लगातार एयरलाइन कंपनी सभ पर एल्गोरिदम आधारित मनमाना मूल्य निर्धारण केर आरोप लगबैत रहल छथि। विशेषज्ञक मानब अछि जे सुप्रीम कोर्टक हस्तक्षेप भारतक विमानन क्षेत्र मे पारदर्शिता, जवाबदेही आ निष्पक्ष मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करबाक दिशा मे एकटा महत्वपूर्ण कदम साबित भऽ सकैत अछि।

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