बंगाल विजयक शिल्पकार : अमित शाहक सूक्ष्म रणनीति आ भाजपा केर बूथ विजयगाथा

अनंत अमित

पश्चिम बंगालक चुनावी रणभूमिमे यदि भारतीय जनता पार्टी ऐतिहासिक बढ़त केर पटकथा लिखनेमे सफल भेल अछि, तँ एकर सबसँ प्रमुख रणनीतिक शिल्पकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केँ मानल जाएत। ई कहब कतहु अतिशयोक्ति नहि होयत जे हुनकर बंगाल दौरा सामान्य चुनाव प्रचार अभियान नहि छल, बल्कि एकटा सुविचारित राजनीतिक सैन्य अभियानक समान छल—जतय हर कदम नपल-तुलल, हर संदेश लक्ष्यित आ हर गतिविधि सत्ता परिवर्तनक लक्ष्यसँ जुड़ल छल।

अमित शाहक 15 दिन धरि लगातार पश्चिम बंगालमे डेरा जमौने रहब एहि बातक स्पष्ट संकेत छल जे भाजपा एहि चुनाव केँ केवल एकटा राज्य चुनावक रूपमे नहि, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति केर निर्णायक मोड़ केर रूपमे देखैत छल। शाह एतय मात्र मंचीय भाषण देबाक लेल नहि आएल छलाह; ओ एकटा एहन वॉर रूम कमांडर केर भूमिकामे छलाह, जे जमीनी स्तरसँ लऽ रणनीतिक शीर्ष धरि हर गतिविधिक निगरानी कऽ रहल छलाह।

ई रणनीति पाछिला वर्षक बिहार विधानसभा चुनाव केर याद दिलबैत अछि, जतय अमित शाह एहेनहि संगठनात्मक नियंत्रण आ सूक्ष्म प्रबंधनक बल पर भाजपा-एनडीएक जीत सुनिश्चित केने छलाह। बंगालमे सेहो ओहि मॉडल केँ आओर बेसी आक्रामक आ परिष्कृत रूपमे देखल गेल।

सुव्यवस्थित चुनावी खाका

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाहक बंगाल प्रवासक पूरा खाका अत्यंत व्यवस्थित ढंगसँ तैयार कएल गेल छल। उत्तर बंगाल, जंगलमहल, सीमावर्ती जिला आ औद्योगिक क्षेत्र केँ विशेष प्राथमिकता देल गेल।

भाजपा पहिनहि 100 सँ 120 एहन सीट चिन्हित कएने छल, जाहि पर जीतक संभावना प्रबल मानल गेल। एकर अतिरिक्त 80 सँ 100 सीट केँ कड़ा प्रतिस्पर्धा वाली श्रेणीमे राखल गेल छल।

श्री अमित शाहक पूरा दौरा कार्यक्रम एहि सीटसभक इर्द-गिर्द बुन्नल गेल। ई चुनावी राजनीति मे संसाधनक अत्यंत सटीक उपयोगक उदाहरण अछि। राजनीतिक दल प्रायः व्यापक प्रचार करैत छथि, मुदा भाजपा सीमित संसाधन केँ अधिकतम प्रभाव वाला क्षेत्रमे केंद्रित कऽ परिणामोन्मुखी रणनीति अपनौलक।

विशेष उल्लेखनीय बात ई सेहो रहल जे हर जोनमे रातिक 1-2 बजे धरि संगठनात्मक बैठक होइत छल, जाहिमे बूथ प्रभारीसँ लऽ जिला स्तरक नेता धरि सीधा संवाद होइत छल। ई स्पष्ट करैत अछि जे भाजपा केर चुनावी मशीनरी केवल नाराबाजी पर नहि, बल्कि डेटा, अनुशासन आ जवाबदेही पर आधारित छल।

50 सँ बेसी कार्यक्रम, अथक चुनावी सक्रियता

आँकड़ाक आधार पर बात करी तँ श्री अमित शाहक 15 दिवसीय दौरा दौरान 50 सँ बेसी कार्यक्रम आयोजित भेल—

30 विशाल जनसभा
12 रोड शो
दर्जनों संगठनात्मक बैठक
अनेक प्रेस कॉन्फ्रेंस

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी केर बाद यदि बंगालमे भाजपा केर कोनो नेता केर सभामे सबसँ बेसी जनसैलाब उमटल, तँ ओ अमित शाह छलाह। ई तथ्य केवल हुनकर राजनीतिक स्वीकार्यता केर प्रमाण नहि, बल्कि बंगालमे भाजपा केर विस्तारशील जनाधारक पुष्टि सेहो करैत अछि।

सबसँ महत्वपूर्ण बात ई रहल जे पहिल चरणक मतदानक दिन शाह स्वयं भाजपा केर वॉर रूममे उपस्थित रहलाह। मतदानक प्रत्येक गतिविधि, बूथ रिपोर्टिंग, मतदान प्रतिशत आ फीडबैक पर हुनकर सीधा नजर छल। ई चुनावी नियंत्रणक एहन मॉडल अछि, जे भारतीय राजनीति मे विरले देखबाक लेल भेटैत अछि।

“चुनाव रैलीसँ नहि, बूथसँ जीतल जाएत अछि”

यदि अमित शाहक राजनीति केँ एक वाक्यमे बुझबाक प्रयास करी, तँ कहि सकैत छी—
“चुनाव रैलीसँ नहि, बूथसँ जीतल जाएत अछि।”

बंगाल चुनावमे भाजपा केर सबसँ पैघ ताकत रहल ओकर बूथ प्रबंधन। शाह फेर साबित कए देलनि जे आधुनिक चुनावी राजनीति मे सेहो व्यक्तिगत संपर्क आ स्थानीय संगठन निर्णायक भूमिका निभबैत अछि।

भाजपा एतय पन्ना प्रमुख मॉडल केँ आओर बहुस्तरीय बनाकऽ लागू केलक। प्रत्येक बूथ पर मतदाताक सामाजिक संरचना, मतदान व्यवहार, स्थानीय मुद्दा आ प्रभावशाली परिवारसभक विस्तृत डेटा तैयार कएल गेल। फेर ओहि आधार पर कार्यकर्तासभक जिम्मेदारी तय कएल गेल।

एहि बेर उम्मीदवार चयनमे सेहो एहि दृष्टिकोणक झलक देखल गेल। भाजपा फिल्मी चेहरा अथवा तात्कालिक लोकप्रियता पर दाँव लगाबयक बजाय एहन उम्मीदवार केँ प्राथमिकता देलक, जिनकर हर बूथ पर 200-300 वोट जुटाबयक वास्तविक क्षमता छल।

ई चुनावी कसौटी स्पष्ट संकेत दैत अछि जे भाजपा आब करिश्माई चेहराक राजनीति सँ आगाँ बढ़िकऽ संगठन आधारित जीतक मॉडल केँ प्राथमिकता दऽ रहल अछि।

राष्ट्रीय राजनीति लेल संकेत

यदि पश्चिम बंगालमे भाजपा केर सफलता अंतिम परिणाममे पूर्ण रूपेण दर्ज होइत अछि, तँ ई स्पष्ट संकेत होयत जे अमित शाहक ई ‘माइक्रो-मैनेजमेंट मॉडल’ आगामी विधानसभा चुनाव आ 2029 लोकसभा चुनाव धरि भाजपा केर केंद्रीय रणनीति बनि सकैत अछि।

बंगाल स्पष्ट कऽ देलक अछि जे राजनीतिक विजय केवल जनसभाक भीड़सँ तय नहि होइत अछि; ई बूथ स्तर पर चुपचाप कएल गेल तैयारी, राति-दिनक संगठनात्मक बैठक आ डेटा आधारित रणनीति पर निर्भर करैत अछि।

यदि ई परिणाम ऐतिहासिक जीतमे बदलैत अछि, तँ इतिहास एहि क्षण केँ केवल बंगालमे सत्ता परिवर्तनक रूपमे नहि, बल्कि अमित शाहक चुनावी रणनीतिक एक और मास्टरक्लास केर रूपमे याद करत।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक छथि।)

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