
नई दिल्ली। आधुनिक जीवनशैली आ खानपान मे तेजी स भ’ बदलाव आब एकटा गंभीर स्वास्थ्य संकट के संकेत द’ रहल अछि। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet Gastroenterology & Hepatology मे प्रकाशित अध्ययन अनुसार, साल 2050 धरि दुनियाभरि मे करीब 180 करोड़ लोक गंभीर लीवर रोग MASLD (Metabolic Dysfunction-Associated Steatotic Liver Disease) के चपेट मे आबि सकैत छथि।
ई आंकड़ा एहि लेल सेहो चिंताजनक अछि किएक तँ 2023 धरि एहि बीमारी सँ प्रभावित लोकक संख्या लगभग 130 करोड़ पहुंचि गेल अछि, आ आबय बला समय मे एहि मे तेजी सँ वृद्धि होयबाक संभावना अछि।
MASLD की अछि आ किएक खतरनाक अछि?
MASLD, जकरा पहिने नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लीवर डिजीज मानल जाइत छल, एकटा एहन स्थिति अछि जाहि मे बिना शराब सेवन के बादो लीवर मे अधिक मात्रा मे चर्बी (फैट) जमा होए लागैत अछि। शुरुआत मे ई सामान्य बुझा सकैत अछि, मुदा धीरे-धीरे ई लीवर मे सूजन, फाइब्रोसिस आ गंभीर स्थिति मे सिरोसिस या लीवर फेलियर धरि पहुंचा सकैत अछि।
तेजी सँ किएक बढ़ि रहल अछि मामला?
विशेषज्ञक अनुसार, एहि रोग के बढ़बाक मुख्य कारण अछि :
* अत्यधिक प्रोसेस्ड आ जंक फूड के सेवन
* शारीरिक गतिविधि मे कमी
* मोटापा आ बढ़ैत वजन
* डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जेकाँ मेटाबॉलिक समस्या
आब ई बीमारी खाली बुढ़ापा धरि सीमित नहि रहल, बल्कि युवा आ किशोर वर्ग मे सेहो तेजी सँ बढ़ि रहल अछि—जकरा भविष्य लेल खतरनाक संकेत मानल जा रहल अछि।
भारत सन देश मे, जतय तेजी सँ शहरीकरण आ खानपान मे बदलाव भ’ रहल अछि, ओतय MASLD के खतरा और बेसी बढ़ि सकैत अछि। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानैत छथि जे जौं समय पर अकर रोकथाम नहि कयल गेल त’ ई स्वास्थ्य समस्या बनि सकैत अछि।
बचाव क उपाय
नीक बात ई अछि जे जीवनशैली मे सुधारि आनि क’ एहि बीमारी स’ बहुत हद तक बचल जा सकैत अछि। अहि स’किछु निम्न सावधानी आवश्यक अछि :
* संतुलित आ पौष्टिक आहार (फल, सब्जी, साबुत अनाज) के सेवन
* चीनी आ रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट कम उपयोग
* रोज कम सँ कम 30 मिनट योग/व्यायाम अथवा वॉकिंग
* वजन नियंत्रण
* समय-समय पर हेल्थ चेकअप (लीवर फंक्शन टेस्ट आदि)
लक्षण कम, खतरा बेसी
एहि बीमारी क एकटा खास बात ई अछि जे शुरुआती दौर मे स्पष्ट लक्षण नहि देखाइत अछि। एहि कारण बहुत लोक समय पर सचेत नहि भ’ पाबैत छथि आ बीमारी गंभीर भ जाएत अछि। MASLD आब खाली एकटा मेडिकल शब्द नहि, बल्कि तेजी सँ बढ़ैत वैश्विक खतरा बनि चुकल अछि। समय रहिते जागरूकता आ सही जीवनशैली स’ एहि बीमारी सँ बहुत हद तक बचल जा सकैत अछि ।