नई दिल्ली। इंद्रप्रस्थ साहित्य भारतीक मध्य साहित्य केंद्र द्वारा शनिदिन नई दिल्लीक प्रवासी भवनमे भारतेंदु हरिश्चंद्र रचित नाट्य पुस्तक ‘नीलदेवी’ पर परिचर्चा आयोजित कयल गेल। परिचर्चाक दौरान वक्ता सभ एहि बात पर जोर देलनि जे एहि नाटकक माध्यमसँ नारी सशक्तीकरण आ राष्ट्रीय चेतनाक अलख जगाओल गेल।
एहि अवसर पर लेखक संजीव त्रिपाठी कहलनि जे भारतेंदु हरिश्चंद्रक नाटक ‘नीलदेवी’ भारतीय सांस्कृतिक धरोहरके अक्षुण्ण रखबाक एकटा सशक्त माध्यम अछि। एहि नाटकक नायिका नीलदेवी राजा सूर्यदेवक रानी छथि। भारतेंदु एहि चरित्रक माध्यमसँ संयमी, साहसी, विवेकशील आ सशक्त नारीक आदर्श प्रस्तुत कयने छथि। ओ कहलनि जे ई नाटक ओहि समय लिखल गेल छल, जखन भारत अंग्रेजी शासनक अधीन छल। एहन समयमे भारतेंदु अपन लेखनीक माध्यमसँ देशवासीक भविष्यक प्रति सचेत करबाक प्रयास कयने छलाह।
युवा लेखक अंकित कुमार दूबे कहलनि जे ‘नीलदेवी’ नाटक पराधीन भारतमे लोकके प्रेरणा देबाक काज कयलक। भले ई नाटक ऐतिहासिक नहि हो, मुदा एकर घटनाक माध्यमसँ राष्ट्रीय चेतना प्रखर होइत अछि। एहि नाटकमेम नवजागरणक सामान्य विशेषता समाहित अछि। ओ कहलनि जे भारतेंदु हरिश्चंद्र एहि नाटकक माध्यमसँ भारतीय नारीक आदर्श आ प्रतिरोधक भावना दुनूके प्रस्तुत कयने छथि। ई नाटक महिलासभके अपन स्थिति बुझबाक आ ओकरासँ बाहर निकलबाक संदेश दैत अछि।
नाटककार एस.पी. सिंह सेंगर कहलनि जे नाटक एकटा अत्यंत प्रभावशाली आ जीवंत दृश्य-श्रव्य माध्यम अछि, जाहि प्रभाव दर्शक पर तुरंत पड़ैत अछि। ‘नीलदेवी’ नाटक नारी सशक्तीकरणक माध्यमसँ समाजके प्रगतिशील बनेबाक संदेश देलक। ओ कहलनि जे भारतेंदु हरिश्चंद्र अपन लेखनीके हथियार बना स्वतंत्रता सेनानीक भूमिका निभौलनि।
लेखिका गुंजन शर्मा कहलनि जे बीतल शरद पूर्णिमाक दिन महर्षि वाल्मीकि जयंती छल। ओ महर्षि वाल्मीकिक रचित दस श्लोक उद्धृत करैत अपन विचार रखलनि। हुनकर कहब छलनि जे महर्षि वाल्मीकि रामायण महाकाव्यक रचना कऽ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामक चरित्रक माध्यमसँ समाजके धर्म आ सदाचारक मार्ग देखौलनि।
कार्यक्रमक अंतमे सरदार वल्लभभाई पटेलक जयंतीक अवसर पर हुनका स्मरण कयल गेलनि। वक्ता सभ राष्ट्रीय एकता मजबूत करबामे हुनकर योगदान पर प्रकाश देलनि।
एहि कार्यक्रममे अखिल भारतीय साहित्य परिषदक केंद्रीय कार्यालय सचिव संजीव सिन्हा, चन्दन कुमार, पवन प्रत्युष, विकास आनंद आ आलोक रंजन सहित अन्य साहित्यप्रेमी लोकनि सहभागिता कयलनि।
