महा मधुर रस धाम श्री, सीता नाम ललाम। झलक सुमन भासत कबहुँ, होत जोत अभिराम॥

  कुमकुम झा नई दिल्ली। जखन कोनो व्यक्ति सूर्यक विषय मे सोचैत अछि, त ओहिमे ओकर…