
मधुबनी। बिहारक मधुबनी जिला मे स्थित बलिराजगढ़, मिथिलाक प्राचीन गौरवशाली इतिहासक प्रतीक अछि। ई स्थान पौराणिक कथा आ ऐतिहासिक धरोहर सँ भरल अछि। बलिराजगढ़ केँ महाबली राजा बलि के राजधानी मानल जाइत अछि, जे प्रह्लादक पुत्र आ विष्णु भक्त छलाह।
पौराणिक कथा अनुसार, भगवान विष्णु वामन अवतार धारण क’ दानवीर राजा बलि सँ तीन डेग (कदम) जमीन मंगने छलाह। वामन रूप स ओ विशाल आकार धारण कए पहिल डेग मे पूरा पृथ्वी आ दोसर डेग मे स्वर्ग-आकाश नाप लेलन्हि। जखन तेसर डेग रखबाक लेल जगह नहि बचल, तखन बलि अपन माथ आगाँ कए देलन्हि।
बलिराजगढ़क किला लगभग तीन हजार साल से पुरान एकटा ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल अछि। ई स्थल 600-200 ईसा पूर्व सँ लए कए पाल काल (8म सँ 12म शताब्दी) धरि के सभ्यताक साक्ष्य समेटने अछि।
एतय प्राचीन दुर्गक अवशेष, विशाल परकोटा, आ माटिक बनल किला आइयो एकर ऐतिहासिक महत्व केँ देखबैत अछि। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा कएल गेल उत्खनन मे एतय सँ प्राचीन बर्तन, मूर्ति आ आन धरोहर भेटल अछि, जे महाभारत काल सँ संबंधित मानल जाइत अछि।
मधुबनी के बाबूबरही स्थित बलिराजगढ़क रहस्य एक बेर फेर सँ उजागर भ’ रहल अछि। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा एतय खुदाई शुरू भ’ गेल अछि। माटिक भीतर मिथिला के गौरवशाली इतिहास दबायल अछि। ई स्थल पुरातात्विक अवशेष आ प्राकृतिक सुंदरताक अद्भुत मेल प्रस्तुत करैत अछि।