
प्रश्न – कहु कुशल भाई कहु कुशल कत ‘ चलल छी एना विकल ।
ठोर ऊपर अछि उजरा फुफरी, सीटल केश कोना उज़रल,
भाई कहु कुशल भाई ……….
उत्तर – कोंढ़ कटै छी करेज छुबै छी, कुशल पुछै कि उपहास करैत छी,
अमती कांट में ओझरायल हम, मरै नै जिबै छी दिन कटै छी,
यौ दिन धरबै छै तीनटा नाम, यौ,हौ,रौ, सुनु परमान,
सटल सासुरक वस्तुजात सभ, चित्त भेल छी ठामहिं-ठाम,
कर्रल मोंछ सोझ भ गेल, जहिया स गठबंधन भेल,
गृहणिक आगम होईतहि घर में, सोझको मोंछ निच्चा खसत,
कि कहु कुशल कि ……….
प्रश्न – आँहा के बीघा-बीघे खेत, घर में गहना गेंटक-गेंट,
किया अनेरे हकन कनै छी, कोठी चाउर हएत दाईल दर्रल,
भाई कहु कुशल भाई ……….
उत्तर – दिन-दिन गृहणिक नब-नब मांग, कहियो लिपिस्टिक कहियो पान,
कहियो चोटी चट्टी साड़ी, कहियो ब्लाउज गुलाबी कारी,
एसनों पाउडर तेल गमकौआ, छोटकी छत्ता लेता बौआ,
आवश्यकता अछि पहाड़ सन, अर्थहीन छी हम दुबकल,
कि कहु कुशल कि ……….
प्रश्न – कत’ गेल स्पंजक चट्टी, कहाँ हाथ में अछि खिलबट्टी,
आँहां के मोटरसाईकिल बिनु अछि, भाम पड़ैत गामक चौबट्टी,
आहां सनक अंगरेजिया लोक के, कोना अपन फैशन बिसरल,
भाई कहु कुशल कि ……….
उत्तर – सुनल कान संतानक भनकी,ताहि में रखलहुँ जेल्लो बन्हकी,
दोसर बेर में घड़ी बेचलहुँ , तेसर में चानिक पनबट्टी,
साल-साल प्रसवक तांडव में, घर पर आब नै खढ़ो बचल,
कि कहु कुशल कि ……….
पूर्व बियाहक सोचथि वर, कनियाँ नीक होअए सुन्नर,
सोचथि अपन गोसाउनि सुमइर, सासुर नीक होई लगहइर,
गुणी हम मोर बड़का भाग, लेलहुँ माथ घुनेसल पाग,
धन हम मदनक प्रथम चरण में, सौराठक बैतरणी तरल,
भाई कहु कुशल कि ……….
थिक बियाह दिल्ली कर लड्डू , जे खेलक सेहो पछतेलक,
आ जे नै खेलक सेहो ललचेलक,
अपन पैर पर ठाढ़ पुरुष जे, सएह दुनियाँ में मौज उड़ेलक,
लापरवाह हमरे सन लोकक, आँखिक नोर स धरती तीतल,
कि कहु कुशल कि ……….
प्रश्न – थिक बियाह गृहस्थक कर्म, सबस पैघ गृहस्थक धर्म,
पुत्रक धर्में उपर बढ़ती, सवा हाथ गाम केर धरती,
जनक जननी त जन्में दै छै, करम चलै छै विधिक लिखल,
भाई कहु कुशल ……….
उत्तर – कहथि सुजीत कवि बड अधलाह,अपन समाजक बाल विवाह,
घर में ढ़न-मन नेना-भुटका, थोड़ेक सुतल अछि थोड़ेक उठल,
कि कहु कुशल कि ……….

डॉ. सुजीत कुमार झा
(योग प्रशिक्षक)