
रामबाबू सिंह मधेपुर
आस्थावान मनुखक प्रवाह- व्यक्ति, विचारधारा, ईश्वर वा भाषा आदि इत्यादि कोनहुँकेँ प्रति होय, ओकरा जबरन बदलल नहि जा सकैए। सालोसालसँ संग्रहित अटूट अविश्वसनीय अवधारणा, अहाँक उकसेला मात्रसँ किनको टूटि नहि सकैए! मुदा जँ केओ वर्चस्व सिद्ध करबाक प्रयासमे निम्नस्तरीय तर्क सँग प्रभावित करबाक प्रयास करैत अछि तँ ओ अपन विचार सँग कदापि आओर मजगुति सँग ठाड़ भS सकैत अछि।
आई काल्हि अप्पन मातृभाषाक वर्चस्व सिद्ध करबाक लेल अजीबोगरीब विमर्श सोसल साइट पर चलि रहल अछि! हिंदी साम्राज्यवादी भाषा अछि मुदा अंग्रेजी नहि! नितदिन केओ हिंदी तँ केओ अंग्रेजी सँग मैथिलीकेँ तौलैत तामसे तांडव करैत देखल जाएत छथि। लाठी लS हाँकि आनि ढ़ट्ठामे बान्हि देब एकर समाधान किन्नहुँ नहि अछि! केओ हिंदी भाषासँ मैथिलीक जड़ि हिलैत देखि रहल छथि तँ केओ मैथिलीसँ हिंदीकेँ आ तहिना अंग्रेजीक सङ्गे अवधारणा बना लेल अछि।
हमरा जनतबे भाषा ओहि समाजमे सँस्कृति सँस्कार साहित्य आदिक निरूपण करबाक सशक्त माध्यम होयत अछि। भाषा कहिओ दोसर भाषाक सोझा तलवार लS ठाड़ नहि होयत अछि, ओकरामे सत्ताविस्तार प्रवृति कदापि नहि होयत अछि। मुदा भाषानुरागी लोकनिक दूषित मानसिकताक परिणाम देखबामे कएको बेर आएल! जखन केओ हिंदी भाषाक विकासक रोड़ा मैथिलीकेँ बुझि दहसतिमे जिवैत देखल गेलाह तहिना मैथिली भाषानुरागीमे किछु लोक देखल गेलाह, मुदा अंग्रेजी नहि। अफ़सोचक गप्प अछि जखन की गामेगाम अंग्रेजी माध्यमक विद्यालय खूब फरैत फुलाएयत भेटैए। गाम घरक बच्चा सभ कनि छेटगर भेल कि अंग्रेजी स्कूल पठबैत गर्वानुभूति करैत अछि।
सम्प्रति देशमे सम्पर्क भाषा जँ कोनो अछि तँ ओ हिंदी अछि। अंग्रेजी एखनहुँ उतर पूब दिस अपन स्थान बनएबामे कएक पीढि खपा देत। मुदा हिंदी तँ आब दखिन दिसि सेहो पसरल जा रहल अछि आ बेसी लोक एहिसँ परिचित रहैत अछि। अंग्रेजीसँ गुणात्मक रुपे बेसी हिंदी भाषाक लोक अपन देशमे अछि।
आब अबैत छी आंगिक बज्जिका दिसि जे मैथिलीए छैक आ दुखद गप्प जे मैथिली भाषी सभ एहि बातसँ परिचित रहितहुँ सदिखन ढुइंस लड़ैत रहैत छथि। हुनकर सभक पोस्ट पर अंगिका बज्जिका देखितहि आगि लेस दैत छनि! बात बात पर फरसा उठबैत रहब तखन ओ सभ अहाँक बात किएक मानत? अहिना हुनका सभकेँ जँ सम्मान दैत रहबन्हि तँ जैह किछु लोक मैथिलीमे लिखि रहल छथि सेहो हाथ जोड़ि देत। मैथिली भाषा कोना सीतामढ़ी सुपौल समस्तीपुर, भागलपुर, मधेपुरा मुज्जफरपुर किसनगंज पूर्णिया आदि स्थान धरि सहजतासँ पसरय से सोचु। मधुबनी दरिभंगासँ घरमे बैसिकS आन आन जिलाक लोककेँ भाषाकेँ नाम पर धकिएबाक प्रयास करबैक तँ हित नहि अहित होयबाक संभावना बेसी अछि।अपन राज्यमे द्वितीय राज्य भाषाक दर्जा कोना भेटय जेना की झारखंडमे अंगिका बज्जिका सँग मैथिलीकेँ देल गेल अछि! मुदा ताहिदिसि कोनो स्पष्ट दृष्टि नहि अछि!
अंगिका बज्जिकाक नाम पर लड़लासँ केवल मैथिलीकेँ अहित करबैक आ कS रहल छियैन्ह! मिथिलाकेँ भौगोलिक रूपसँ एकिकृत करबाक लेल भाषायी माध्यमे एक दोसरक मान सम्मान एकमात्र उपाय अछि। खाली गप्प देलासँ अहाँक गप्पकेँ माथ पर केओ नहि सजा लेत। तेँ है भाषानुरागी लोकनि दोसर पर आँगुर उठाएबासँ पहिनहि अप्पन अन्तर्मनकेँ अवलोकन करि जे हम कतय छी आ हमर भाषा कतय अछि? प्रतिस्पर्धा करब उचित मुदा दुर्भावनावश दोसरकेँ मरि जएबाक श्राप दS बैसल रहब कोढ़िया लोकक काज थिक। मैथिलीकेँ मिथिलामय करू , सभटा जयजय स्वतः भS जाएत।