Budget 2022 : ई संक्रमणकालक विषकाल अछि की अमृतकाल !

नई दिल्ली। मोदी सरकारक वर्ष 2022-23क आम बजट सँसदमे प्रस्तुत कएल गेल। ई बजट जनकल्याणकारी हएत आ की विनाशकारी से तँ जानथि विधाता कारण जतय बड़का बड़का निपुण अर्थशास्त्री लोकनि किंकर्तव्यविमूढ़ छथि ओतय आमलोक कोन खेतक मुरई! जतेक मुह ओतेक तरहक बात! पक्षधर लेल ई बजट ऐतिहासिक दूरदर्शी अछि जतय पचीस वर्ष आगाँक सोचल गेल अछि। ओतय आलोचक लोकनिक मोताबिक सब बुढ़िया फूसि!
ओना ई आजाद देशक पहिल कोनो सरकार अछि जनिका देशक वर्तमान दशा दुर्दशाक चर्च मात्रसँ पसीना छूटि जाएत छनि! ओ भूतात्मा जकाँ भूतकाल आ त्रिकालदर्शी जकाँ भविष्यक सोच राखैत छथि आ ओकरे ढोल पीटि आत्ममुग्ध होयत रहैत छथि । सरकारकेँ वर्तमान दशाक फुसफुसाहट मात्र पर एना स्मृतिलोप भS जाएत छनि जेना बिनु टेलीप्रॉम्प्टरकेँ भेल छलनि!
मुदा एकटा सामान्य नागरिक होयबाक नाते सान्दर्भित मन्तव्य अवश्य राखक चाही। अहि सन्दर्भमे जरूर चेपS चाही। ई एकटा मौलिक अधिकार अछि आ कर्तव्यक जँ बात करि तँ तकर वोध किछुए दिन पहिने माननीय सेहो कराओने छलाह। एकटा जागरूक नागरिककेँ देशहितमे अपन विचार सदैव खुजि कS राखक चाही।
एकबेर हुनक एकटा साक्षात्कार मोन पड़ि रहल अछि जाहिमे रोजगारक मुद्दा पर बेबाक भS ओ बाजल छलाह- जे देशक पढ़ल लिखल प्रवीण युवा वर्ग हाथक सफाई सेहो देखा सकैए छथि! अहिसँ 65% युवावर्ग हस्त कलामे सिद्धस्त सेहो भS जएताह संगहि छोटछिन ढऊआ कौड़ीसँ अप्पन व्यवसाय सेहो ठाड़ कS सकैए छथि! बेजाए नहि सूचना क्रांतिक एहि युगमे युवा कमसँ कम बेरोजगार तँ नहिए भS सकैत अछि! ओ देशमे राष्ट्रीय वा क्षेत्रीय पार्टीकेँ शरणागत भS ओकर झुठक प्रचार हाथक सफाईसँ कS सकैए छथि! सुल्ली मुल्ली टुल्ली एप्प्स बना अप्पन आ देशक नाम चमका सकैए छथि! संगहि सँग अमृतकालक जैह किछु आगा साल बाँचल खुचल अछि ओहिमे कोना विषवमन कएल जा सकैए, ताहि दिस हाथक सफाई देखा सकैए छथि। ई सभकेँ इत्तर चाह पान पकौड़ा दूध दही आदि इत्यादिक बेपार कS सकैए छथि!
रोजगारक अर्थ की सरकारी नौकरिए टा होयत छैक! साहेब केर तँ खुनमे व्यापार छनि से कएको बेर स्वयं उद्धोषना कए चुकल छथि! तेँ ओ बेपार पर बेसी जोर लगबैत छथि! बेपारसँ हुनक आशय छनि,चाहक दोकान पर, रेडी पटरी पर, पानक खोखा पर, टायर पेंचरक दुकान पर, आदि इत्यादि सेहो सब सरकारी रोजगार श्रेणीमे अबैत अछि नहि की मात्र कल कारखानामे कार्यरत लोक।
कल कारखाना बला बेपारीक स्थिति तँ पातालोनुमुखी बनल जा रहल अछि, ओ एना गोंता रहल अछि जाहि देखि ओंघायल अहिरावणक निनि सेहो उचटि गेल हेतनि मुदा हाय रे करम आँखिक सोझामे तबाह होयत बेपारीक दरद एतहुका कुम्भकरणकें नैS सूझि रहल छनि। ओ तँ एकरा अपन उपलब्धि बुझि अमृतकालक उत्सव मना रहल छथि। जँ एहन विषमकालक विषकालकेँ अमृतकालसँ अलंकृत कएल जाए तँ वास्तवमे ‘विनाशकाले विपरीत बुद्धि” कहबी एकदम सटीक कहल जएतैक। सम्प्रति देशमे बेपारक एहन कोनो क्षेत्र नैS जतय मरघट सन दृश्य नैS देखल जाइत होय, परञ्च अहि सन्दर्भमे सरकारक सोच पर एकटा आरो कहबि मोन पाड़ैत अछि जे ” किदन फटेS तँ मल्हार गबैS”।
देशमे धन्नासेठसँ लSक निर्धन जन मजूर सब एक समान टैक्स भरैत अछि। सभक बरोबरि भागीदारी अछि मुदा कॉरपोरेट टैक्स 30% सँ घटा घटाक 15% धरि कS देलक मुदा आम जनताक लेल वएह ढाकक तीन पात। हुनका लेल विकासक झुनझुना , सड़क बिजली पानी आदि। की ओहि सड़क बिजली पानीसँ कॉरपोरेट दूर रहैत अछि। एहि दोहरा चरित्रकेँ दोगला नीति सेहो कहल जा सकैए! देशमे 97% लोकक आमदनी घटलैए, 3% लोकक आमदनी शिखर धरि पहुँचलैए! एहन आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था केवल अमृतकालमे सम्भव अछि!
देशक पढ़ल लिखल युवा पेटक लेल नेता सभक चमचागिरी करैए, पकौड़ा बेचय वकिंवा अपन देहक खून ओहिसँ हुनका कोनो मतलब नहि! मध्यम वर्गीय नौकरी पेशा बला सभ टैक्स भरैत रहौक आ एहिकें लेल सुविधाक नाम पर केवल घोषणाक झुनझुना हाथमे धरबैत रहौक । सरकारकेँ अहाँ परजीविक पर्याय कहि सकैए छी। अपनहुँ पेटक जोगार जँ ओ सभ अप्पन परिश्रम ईमानदारीसँ कमा लितथि तँ देश पर पैघ उपकार होइतहि संगहि देश हिनका लोकनिक आजन्म कृतज्ञ होयतनि!
देशक अतेक बड़का संसाधनकेँ उपयोग अपन पसिनके लोकक बीच बानर जकाँ बाँटि रहल छथि मुदा स्वयं देशहितमे किछु कमाओताह से नहि होयत छनि। अगबे टैक्स कोना बेसी सँ बेसी असुली कएल जाए आ ताहिलेल दुनिया भरिक अर्थशास्त्रिक भजारक जमघट लगाओने छथि! मुदा आर्थिक विषमता कोना कम होय आ कोना लोक अपन जीवन जापान ठीक ठाक कS सकैए ताहिलेल कोनो दृष्टि नहि!
सऊदी अरब आ सङ्गे किछु आओरो देश एहन अछि जे अपन नागरिकसँ टैक्स नहि असुलैत अछि। सऊदी अरब सेहो सर्वाधिक युवा बला देशमे गनल जाएत अछि! ओतय तेलक दाम ऊपर नीचा भेलासँ देश आर्थिक रूपसँ बेसी प्रभावित होयत रहैक ताहिकेँ संतुलित करबाक लेल बिलियन डॉलर केर व्यवसायिक प्रोजेक्ट पर काज केलक जाहिसँ भविष्यमे निफिकिर भS रहि सकैए। एना नहि की कमा रहल उपक्रमकेँ बेचि आ घाटा बलाकेँ खरीद लागल! तन मन धनसँ बलिष्ठ भरल पुरल तँ रावणो छलाह मुदा अहंकार अज्ञानताक कारण अपन समस्त कुल सङ्गे देशकेँ ‘खोप सहित कबूतराय नमः” करा श्रधांजलि दS अपनो चलि गेलाह।
इच्छाशक्तिक घोर अभाव केवल एकमात्र कारण अछि। रेलवे लग अथाह संसाधन अछि जे बेचS सँ नीक ओकर आर्थिक रुपे विकास पर ध्यान केंद्रित कएल जाय। देशक पर्यटन स्थल पर काज कएल जाय। हजारो करोड़क आईपीएलमे नीलामीसँ बटोरल धन पर टैक्स लगा कमाओल जाय मुदा ओतय साँप सूँघि जाएत छनि। लाखो करोड़क कर्जा लSक ‘बुलेट ट्रेन’ बनाकS देशमे कतेक लाभ कमा सकैए ताहि दिस सोचल जाए! मतलब कमएबाक काज केवल आम जनता टाकेँ नैS होय। जनता नहि केवल दधीचिक हड्डी बनय आ शेष सभ मौज करय! एहि मानसिकतासँ उबरबाक खगता छनि!
अमेरिका सङ्गे आन आन कएको देशकेँ हमर देशक धरती उर्वरतासँ भरपूर देखा रहल छैक। दुनियाक लेल हमर देश अवसरक देश मानल जाएत अछि मुदा ई हमरा सभकें नैS सूझि रहल अछि? खाली खैरात कतेक कोना आ कतयसँ भेटत ताहिलेल खकटल रहलासँ देश विकासक शिखर पर चढ़ि जाएत! औ जी छोट छीन किछु लाख आबादी बला देश भूटान जे विश्वमे सभसँ निर्धन देश मानल जाएत अछि परञ्च ओ विश्वमे सभसँ खुशहाल देशमे सेहो गनल जाएत अछि! ओतहुका सरकार जीडीपी पर नहि जिएनच अर्थात ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस पर काज करैत अछि। भूटान लोक नैतिक आ आध्यात्मिक अकासमे विचरण करैत भौतिकवादी प्रतिस्पर्धासँ दूर रहैत अछि आ यएह छनि हुनकर सभक संतोषप्रद जीवब जीवाक राज।
एकबेर भूटानक प्रधानमंत्रीक साक्षात्कार पढ़ने रही ओ बाजल छलाह जे हम पेशेबर सर्जन डॉक्टर छी परञ्च हमरा पढ़ाई पर एकहू गोट टाका हमर वा हमर घरक नहि खर्च भेल अछि! हमर देशक सरकारक नीति अछि जाहिमे हरेक नागरिककेँ दबाई आ पढ़ाई निःशुल्क भेटैत अछि। ई सुनिश्चित करबाक जिम्मेबारी सरकारके होयत अछि। हमर सरकार “सकल राष्ट्रीय खुशी” बला नीति पर काज करैत अछि। की अपन देशमे ई संभव छैक!
देशक आम जन सभसँ बेसी बरबाद अछि दबाई आ पढ़ाई केर खर्चसँ। ताहि लेल कोनो सरकारक कहिओ सोच नहि रहल। आजादीक सात दशक पश्चातो देशक बहुतायत लोक सरकारी मुफ्तक अनाज पर आश्रित होय आ किछु लोक बिनु भोजन काल कल्पित धरि भेल हो ओहन देशमे जँ कोनो सरकारी उत्सव बला बात होय तँ की कहल जाय! कोनो निस्सन नीति नहि आ नहि नेति देखल जाएत अछि।
एहि कोरोना कालमे कोरोडो परिवार आर्थिक रूपे बरबाद भS गेल। शिक्षा संस्थान आ छात्र सभसँ बेसी प्रभावित भेल।पढ़ाई लिखाई साढ़े बाइस मुदा फीस पूरा पूरा भरबाके अछि। हजारों तरहक लोक लुभाबन योजनासँ देश भरल पुरल अछि। मुदा किछु योजनाकेँ छोड़ि सभटा अनर्गल अनुपयोगी अनर्थकारी। सभ योजनाके स्थान पर देशक सर्वोच्च पंचायत हरेक नागरिक लेल पढ़ाई आ दबाई सुनिश्चित करबाक नीति लागू कS दैक तँ शेष सभटा स्वतः सुधरि जेतै!

साभार

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