
हे जगदीश्वरि दनुज संहारिणि सूनि लिऔ ई हमरो बात।
सौंसे जगत आइ बिलखै अछि कोरोनासुरकेर उत्पात ।।
चीनसँ ऊठि चलल ई मरकी सोझे पहुंचल जाय यूरोप ।
फ्रान्स जर्मनी स्पेनक संग ठुनकि रहल इटलीकेर पोप ।।
छुतहा रोग एहन सांघातिक पसरय ककरो छूनहि गात।
हे जगदीश्वरि दनुज संहारिणि सूनि लिऔ ई हमरो बात।।
सुन्न पड़ल मक्का ओ मदीना, काबा फारस हाल बेहाल ।
पाकिस्तान उपचारक बदला खूनि रहल कब्बर तत्काल।।
घेंटी हाथ मिलान बिलायल, सबहि रहैए काते कात ।
हे जगदीश्वरि दनुज संहारिणि सूनि लिऔ ई हमरो बात ।।
विश्वक कक्का जे अमेरिका थानेदार कहबैत रहय।
घुड़की धमकी बम-बारुदसँ जगकें जे डेरबैत रहय।।
कोरोनासुर चालिक आगाँ बादशाह भेल ओकरहु मात ।
हे जगदीश्वरि दनुज संहारिणि सूनि लिऔ ई हमरो बात ।।
भारत धर्मभूमि रक्षा हित त्वरित सन्नद्ध प्रशासन भेल।
किंतु असुरकेर सहयोगी सब दुष्ट पतित झट कयलक मेल
एहि पापक संवाहक बनि गेल तबलीगी पपियाह जमात।
हे जगदीश्वरि दनुज संहारिणि सूनि लिऔ ई हमरो बात ।।
रक्तबीज जे कयल उकन्नन मातु भवानी होथु सहाय ।
घरघर बंद कनै अछि संतति चहुंदिस स्वर बस हाय रे हाय
कालरात्रिकें काटि हे काली आब देखाबिअ नवल प्रभात।
हे जगदीश्वरि दनुज संहारिणि सूनि लिऔ ई हमरो बात ।।

– डाॅ शंकरदेव झा
अनुपम रचना.