
नई दिल्ली। विश्वक सबसँ पैघ नाट्य उत्सव “भारत रंग महोत्सव” केर 25म संस्करण मे मैथिली नाटक “सखा” केर मंचन दर्शक सभ लेल एक विशेष आकर्षण रहल। 17 मार्च 2026 क’ दिल्लीक मेघदूत सभागार मे अछिञ्जल द्वारा प्रस्तुत एहि नाटकक लेखन आ निर्देशन काश्यप कमल कएलनि। दू पात्रीय एहि नाटक मे मुख्य भूमिका मे काश्यप कमल आ सुनीता झा केर सशक्त अभिनय दर्शकक मन जीत लेलक।
“सखा” स्त्री-पुरुष संबंधक एक नव दृष्टिकोण प्रस्तुत करैत अछि। ई नाटक संबंध आ रिश्ताक सूक्ष्मता कें गहराई स’ परिभाषित करैत अछि आ मानवीय जीवन मे उपजल जटिलता सभ कें संवेदनशील ढंग स’ उजागर करैत अछि। नाटक मे मनुष्य द्वारा झेलल जा रहल विभिन्न समस्या आ ओहि सँ उबरबाक संघर्ष कें प्रभावशाली रूप स’ देखाओल गेल अछि।
जीवनक अनेक त्रासदी सँ उपजल अंतहीन पीड़ा सँ मुक्ति कें खोज “सखा” केर मुख्य भाव अछि। ई नाटक स्वाभाविक मानवीय व्यवहार सँ उपजल समस्या पर गंभीर मंथन करैत अछि आ सतही वर्गीकरण कें स्वीकार करबाक विरुद्ध ठाढ़ होइत अछि।
दाम्पत्य जीवनक दायित्वबोध आ मित्रताक गुणक समिश्रण द्वारा “सखा” स्त्री-पुरुष संबंध कें एक नव संज्ञा देबाक प्रयास करैत अछि। नाटक एहि संबंध कें गहराई स’ परिभाषित करैत अछि, जाहि मे भावनात्मक आ सामाजिक पक्षक संतुलन देखाएल गेल अछि।
विशेष रूप स’, लगभग 100 वर्ष बाद एहि नाटक मे ग़ज़ल केर प्रयोग कएल गेल अछि, जे एकर नाटकीय मूल्य कें आरो समृद्ध बनबैत अछि। “सखा” न केवल एक नाटक, बल्कि मानवीय संबंधक गहन विश्लेषण प्रस्तुत करय वाला एक सशक्त रंगकर्म बनि क’ उभरल अछि।