एखन मिथिलामे एकटा ‘सरकार’ छथि

डॉ प्रकाश झा

आइ मोन पड़ैत अछि – पटना, दिल्ली आ मुम्बई । मात्र शहर नहि एहि सब शहरमे आयोजित भेल एम.एल.एफ. । यानी ‘मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल’ । आ से आयोजन एम.एल.एफ. नहि, एहि आयोजनक केंद्र विंदुमे खुट्टा बनल ठाढ़ हमर सबहक प्रिय ‘सरकार’ । बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र वा कि केंद्रक सरकार नहि – विनोद कुमार झा नामधारी ‘सरकार’ ।
सरकार जहिया पटना रहथि त’ पटनामे, जहिया दिल्ली रहथि त’ दिल्लीमे, आब मुम्बईमे छथि त’ दू बेर स’ मुम्बईमे आयोजित भ’ रहल अछि एम.एल.एफ. । पटनामे त’ नहि मुदा दू बेर दिल्ली आ दू बेर मुम्बईमे हमरो अपन उपस्थिति देबाक संयोग लागल अछि आ से टाईम-पास जेना नहि, पूर्ण रूपेण समर्पण भाव स’ ।
कोनो साहित्यिक आयोजन स’ समाजक बौद्धिक आ सांस्कृतिक जीवन समृद्ध होइत छैक, एहि स’ समाजमे चिंतन, आपसी संवाद आ सामाजिक विकासक प्रक्रिया आगू बढ़ैत छैक आ ताहि लेल ‘मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल’ एकटा आवश्यक आयोजन थिक; आदि – आदि ज्ञान परसब हमर लक्ष्य नहि अछि । हमर लक्ष्य ‘सरकार’ छथि आ हिनक प्रयास स’ आयोजित ‘मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल’ ।
मिथिला समाजक तथाकथित प्रबुद्ध मैथिली साहित्यकार जेना हमरो बड्ड तामश उठल अछि ‘सरकार’ पर । दिल्ली आ मुम्बईमे एहि आयोजनक बाद कतेको फेसबुकी स्वनामधन्य साहित्यकार लोकनिक कोप भाजन किएक बनैत छथि ई ‘सरकार’ ? हिनका सबहक कोप आ दुत्कारी स’ किएक किछु नहि सीख सकलाह ‘सरकार’ ? जर्मनीक ‘पाइड पाइपर’ जेना आखिर कोन एहन धुन अपन बसुरी स’ निकालइत छथि ई ‘सरकार’ जे मिथिलाक सबटा मूस सन बकलेल रचनाकार कखनो दिल्ली त’ कखनो मुम्बई चलि जाइत छथि ? अपन घरमे खयता-पीता आ भोर स’ राति धरि पानक पीक फेसबुक पर फेकता से किएक नहि सोहाइत छन्हि एहि ‘सरकार’ के ?
मिथिलाक साहित्यकारकेँ महादेव जेना तेसर नेत्र त’ छन्हिए आ किछु गोटे अपना जेबीमे ‘गैलीलियो बला दूरबीन’ सेहो रखने रहैत छथि; जकर लेंस एखन मुम्बईक ‘मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल’ दिस घूमल छलन्हि । किनको एहि सुसज्जित फॉर्म हाउस के ‘सुर सागर’मे रस रंजन करैत साहित्यकार देखेलन्हि त’ किनको मंच पर एक सत्रमे बहुत रास वक्ता अभरि गेलन्हि । किनको वरिष्ठ साहित्यकार नहि देखेलन्हि त’ किनको सत्रमे गंभीरता नहि बुझेलन्हि । कियो देख लेलखिन जे ‘सरकार’ सरकारे जेना ‘मैथिली लेखक संघ’ के भरना राखि देलथिन्ह त’ किनको रामजीक विवाहक भार मे अँकुड़ी टेढ़ देखा गेलन्हि । ई सब जनइतो ई बुढ़बा ‘सरकार’ एक टांग पर ठाढ़ भ’ सैकड़ो मैथिलक सत्कार किएक करैत छथि ? आइ हमरो तामश उठल अछि हिनका पर ।
सम्पूर्ण मिथिलामे एक–स’–एक काबिल आ धनाढ्य स्वनामधन्य संस्था आ साहित्यकार छथि । कियो एहन साहित्यिक जमाबड़ा नहि क’ पबैत छथि । जँ करबो करताह त’ हुनका पर विश्वास क’ क’ लोक नहि पहुँचैत छनि । किछु महान हस्ती त’ अपन जन्मदिनक बहन्ने लोक के आबत-जाबत किराया आ पाग – डोपटा संग आमंत्रित करैत छथि, अपना लेल काव्यरचना आ स्वस्तिवाचन तक करबैत छथि; मुदा तैयो लोक अही ‘सरकार’ पर भरोस किएक करैत अछि से नहि जानि ।
यौ ‘सरकार’ ! सत्ते अहाँ महान छी, अहाँ सन मैथिली साहित्यसेवी नहि अछि दोसर एखन एहि मिथिलामे जिनकामे एहन अनुराग होइन, अपन छोट लेल एहन स्नेह होइन, हृदयमे आत्मीयता भरल रहनि । प्रत्येक सृजनकर्ताक चिंता होइन । की भेटैत अछि अहाँके ? मुम्बई स’ अबैत काल ठिके कहने रही अहाँ “देखिहै बौआ… काल्हि स’ हमरा लेल लोक सब फेसबुक पर की – की लिखतइ” । ओ सब मात्र लिखिएटा सकैए, कू-चर्चा मात्र क’ सकैत अछि, अपन अस्वीकारता के साबित करबा लेल एहन लोक अहाँक विभिन्न रूपे क्ष्ररण क’ सकैत अछि ‘सरकार’… मुदा अहाँ युवातूरक हृदय पर विश्वासक गोदना गोदा देने छियै ‘सरकार’ । अहाँक औरदा खूब हुए, शरीर स्वस्थ्य रहय आ जल्दिए फेर हम सब अहाँक स्नेहक ऋणि बनी ‘सरकार’ । मैथिली साहित्यक प्राणवायु छी अपने । गौरव संग कहैत छी जे एखन मिथिलामे एकटा ‘सरकार’ छथि ।


(लेखक के फेसबुक सं साभार)

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