
कखनो कखनो एहन समय ओ परिस्थिति अबैत छैक जखन एक तरफ खुशी तँ दोसर दिस किछु एहन अप्रिय घटना घटि जायत जाहि सँ दुःखी होयब स्वाभाविक।वर्ष 2006 केर वार्षिकोत्सव सँ ल’क’वर्षांत नाट्य आयोजन (ठहाका) तक ‘पारिजातहरण’ नाटकक विभिन्न शहर मे नाट्य प्रस्तुति,नाट्य उत्सव ,पामरा आयोजनआदि कार्यक्रम जतय भंगिमाक लेल सुखदायी छलैक ओही कालांतर मे प्रेमलता दीदीक “समय साल”पत्रिका मे एक इंटरव्यू छपल रहैक जाहि मे हुनक ओ कथन जे हम आब भंगिमा सँ मुक्त छी, एहने सन बात किछु रहैक, ई बात हमरा लोकनिक लेल निशिचत रूप सँ दुःखदायी छल। से उमाकान्त भाइ,आशुतोष जी,आ हम तीनू गोटे दीदीक आवास पर गेलहुँ । बहुत बात भेलैक। कहलनि जे हम भंगिमाक सदस्य रूप मे नहि रहब,ओना आर सभ सहयोग जे होयत से करैत रहब,कारण आब हम कोनो पद नहि लेबय चाहैत छी। जँ सदस्य रहब तँ फेर अहाँ सभ आइ ने काल्हि अध्यक्ष/सचिव बनबैक लेल बाध्य क’देब । तेँ हम आब एहि सँ अपना केँ दूर रखबाक मन बना चुकल छी ।–हमरा लोकनि कतबो कहलियनि मुदा ओ अपन निर्णय पर अडिग छलीह । पुनः बटुक भाइजीक आवास पर तीनू गोटे गेलहुँ, सभ बात कहलियनि । हुनक बात वैह रहनि, जाधरि प्रेमलताजी नहि स्वीकार करतीह,हमहुँ अपन सक्रियता सँ दूर रहब। आब नवलोक सभ अपना हाथ मे दायित्व लिअ, आ काज करू। आर सहयोग दैत रहब। एहने सन बात बटुक भाइजीक छलनि। एम्हर कुणाल भैया कहि चुकल छलाह जे हम आगामी सत्रक लेल अध्यक्ष नहि होयब। अहाँ सभ ताहि लेल विचार क’लिअ । तखन कतेक विचार-विमर्शक बाद,उमाकान्त झा राजी भेलाह । से सत्र 2007-08 क लेल अध्यक्ष बनाओल गेलाह उमाकान्त झा । सचिव भेलाह आशुतोष मिश्र,आ कोषाध्यक्ष पद पर हम कुमार गगन । एहि तीनू गोटे पर एक नव दायित्व आबि गेल, भंगिमाक गतिविधि केँ निरंतर रखबाक हेतु ।
अप्रैल महिना मे मधुबनी मे इप्टाक राज्यस्तरीय समारोह होइबला छलैक । संजीव मिश्र भंगिमाक अतिरिक्त पटना इप्टा सँ सेहो जुड़ल छलाह । हुनका द्वारा प्रस्ताव आयल जे एहि समारोह मे भंगिमा अपन चर्चित नाटक ‘पारिजातहरण’क प्रस्तुति करय । पूरा कार्यक्रम राज्यक विभिन्न जिलाक इप्टा यूनिट सँ होइबला छलैक। भंगिमा केँ आमंत्रण संगहि मैथिली नाटकक प्रस्तुति एहिमे अपवाद छलैक। आयोजन सेहो वृहद छलैक। दिन मे देशक प्रतिष्ठित रंगकर्मी,नाटककार,निर्देशक सभहक व्याख्यान आ राति मे सांस्कृतिक कार्यक्रम,नाट्य प्रदर्शन। मधुबनीक बमबम बाबू आयोजनकर्ता मे प्रमुख रहथि।
एम्हर सत्यभामाक भूमिका केनिहारि स्वाति सिंह उपलब्ध नहि छलीह । से संजीवक सहयोग सँ प्रीति झा नवयुवतीक आगमन भेल भंगिमा मे । सत्यभामाक रोल वैह कयलनि। बाँकी कलाकार मे कोनो विशेष परिवर्तन नहि भेलैक। 20 अप्रैल 2007 केँ ‘पारिजातहरण’क प्रस्तुति मधुबनीक वॉट्सन स्कूल के मैदान मे भेलैक। बहुत संख्या मे दर्शकक उपस्थिति ओहि मे कामरेड भोगेन्द्र झा सन विद्वान मातृभाषानुरागीक उपस्थिति हमरा सभहक लेल बहुत आह्लादकारी छल । मधुबनी मे भंगिमाक प्रस्तुति बहुत दिनक बाद भेल छल। खुला मंच पर नाट्य प्रस्तुति एक नव अनुभूति देलक बहुत दिनक बाद।
मधुबनी सँ आयलाक बाद विचार होमय लागल जे एहिबेर वार्षिकोत्सव मे कोन नाटक कयल जाय । कोनो नव नाटक उपलब्ध नहि । तखन अध्यक्ष उमाकान्त जीक विचार भेलनि जे भंगिमा सेहो एकबेर “धूर्त समागम” नाटक करय । एहि सँ पूर्व अइ नाटकक प्रदर्शन अरिपन नाट्य संस्था द्वारा अनेको बेर भ’ चुकल छलैक। ज्योतिरीश्वर ठाकुरक एहि प्रसिद्व प्रहसनक प्रदर्शन आलेख डॉ अरविंद ‘अक्कू’ जी कयने छथि । से विचार भेलैक हुनके कहल जाय मुदा भंगिमाक लेल नव नाट्यालेख लिखथि से आग्रह कयल जाय । निर्देशन के करत ? विचार भेलैक जे युवा रंगकर्मी संजीव मिश्र केँ कहल जाय। संजीव सेहो एहि अवसर केँ चुनौती लैत स्वीकार कयलनि । एकरबाद संजीव अक्कू भैया सँ संपर्क कयलनि । अक्कू भैया सेहो विचार विमर्शक बाद एक नव नाट्यालेख भंगिमाक लेल लिखलनि । एहिमे परवेज अख़्तर साहेबक परामर्श सेहो उल्लेखनीय छल। संजीव सेहो अपन परिकल्पना सँ किछु नव करबाक कोशिश कयलनि। एहि नाटकक निर्देशक भने युवा छलाह मुदा भंगिमाक सभ वरिष्ठ कलाकारक उपस्थिति एहि प्रस्तुति मे छल। उमाकान्त जी विश्वनगर,स्नातक कुमार गगन, मूलनाशक अभय कुमार यादव, असज्जाति मिश्र लक्ष्मी रमण मिश्र, विदूषक ब्रह्मानंद झा,क संग मृतांगर ठाकुर अभय मिश्र,रक्षपाल हीरालाल राय। सूत्रधारक भूमिका मे आशुतोष अभिज्ञ आ नटी बनल छलीह प्रियंका झा। अंनगसेना प्रीति झा,आ सूरतप्रियाक भूमिका मे आशा चौधरी । श्रीमती आशा चौधरी पहिल बेर मंच कलाकरक(अभिनेत्री) रूप मे मैथिली रंगमंच पर अयलीह । हिनक प्रवेश मैथिली रंगमंचक लेल सुखद संदेश छलैक। एहि नाटकक बाद आशा जी लगातार मैथिली रंगमंच पर अपन अभिनय सँ अमिट छाप छोड़लनि। एखनधरि सक्रिय छथि। निर्देशक एहि नाटक मे कोरस केर उपयोग सेहो कयने छलाह जाहि मे भस्कारानंद झा, ज्योति,चंद्रप्रभाक सहभागिता छल। नाटकक बेशभूषा विशेष रूपसँ डिज़ाइन कयने छलाह परवेज़ अख़्तर भैया ।कुणाल भैया आ मनोज मनुज रूपसज्जा कयने छलाह। संगीत निर्देशन छल आशुतोष मिश्र जी केँ। किशोर झाक प्रकाश परिकल्पना। एहि तरहें सम्पूर्ण भंगिमाक दल लागल छल।
से संजीव मिश्रक निर्देशन मे एहि “धूर्त्त समागम” नाटकक प्रस्तुति अविस्मरणीय छल । एहि नाट्य प्रस्तुति केँ प्रसिद्ध नाटककार हृषीकेश सुलभ जी सेहो देखने छलाह । एहि नाटकक कथानक आ प्रस्तुति पर एक विस्तृत विवरण आदरणीय सुलभ जी ‘कथादेश’ पत्रिका मे लिखने छथि। ओहि मे उमाकान्त जी आ हमर नाम विशेष रूप सँ अभिनय हेतु उल्लेख कयलनि से स्वाभाविक रूप सँ नीक लागल।
हं एकटा बात मोन पड़ल, हिन्दीक वरिष्ठ रंगकर्मी अनीस अंकुर सेहो नाटक देखय आयल रहथि। नाटक देखलाक बाद कहलनि जे, “हम तो यह नाटक विशेष रूप से इसलिए भी देखने आए थे कि एक युवा लड़का किस तरह इन वरिष्ठ अभिनेताओं के साथ काम किया है।”
से उमाकान्त जीक अध्यक्षता मे संजीव मिश्रक निर्देशन मे अक्कू भैया लिखित “धूर्त्त समागम”क प्रस्तुति भंगिमा केँ एक नव संचार देलकैक। एहि नाटक सँ जुड़ल सेहो अनेको मधुर स्मृति—!
(कुमार गगन जी कें फेसबुक वाॅल सं साभार)