
मिथिला मे प्रायः घरे-घर सत्यनारायण भगवान के पूजा होइत अछि तथापि हुनक मंदिर कतहु नहि देखाइत अछि। हरिद्वार समेत देशक किछुए स्थान पर सत्यनारायण भगवान के मंदिर देखाइत अछि। मिथिला मे सर्वाधिक पूजित सत्यनारायण भगवान के मंदिर नहि होयबाक बात विस्मित करैत छन्हि बहुत लोक के।
वास्तव मे सत्यनारायण भगवान (विष्णु) आ शिवजी के पूजा मूर्ति-मंदिर मे साकार पूजा स पहिनेहि स प्रचलन मे अछि। शुरुआत मे भगवान के निराकार रूप में पूजा होइत छलन्हि। सतयुग मे आप्त रूप मे भगवान के पूजा के विधान छल, जाहि मे भगवान के कोनो औपचारिक आकार (मूर्ति) नही होइत छलैक। अक्षत (चावल) आ पुंगीफलम के भगवान मानि मंत्रोसिक्त क भगवान के पूजा के प्रावधान छलैक। छठि पूजा (सूर्य उपासना) सेहो प्रारंभिक पूजा पद्धति अछि। छठि पूजा मिथिला समेत बिहार आ पूर्वी उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक लोकप्रिय लोकपूजा अछि तथापि सूर्यदेव के मंदिर सेहो मिथिला सहित अहि क्षेत्र मे प्रायः नहि देखाइत अछि। सूर्य मंदिर सेहो कोणार्क समेत देशक किछुए स्थान मे अछि। सत्यनारायण भगवान आ शिवलिंग पूजा के माध्यम स आदिकाल स भगवान विष्णु आ शिवजी के पूजा होइत रहल अछि।