
पटना। आधुनिक भारत केर निर्माण कर’ वला सहस्त्र समुदाय एकर पुरातन इतिहास आ बहुवादी लोकाचार मे उपस्थित सृजनपरक अभिव्यक्ति, निष्ठा वा मूल्यक संपोषण करैत अछिl अमूर्त सांस्कृतिक विरासत, व्यक्ति वा समाज के आत्माभिव्यक्ति वा अन्वेषण लेल प्रोत्साहिते टा नहि करैत अछि, मुदा रचनात्मक विशिष्टताक लेल समाजिक बल रुपें विकसित सेहो करैत अछिl अमूर्त संस्कृति समाजिक एकताक भावना, मूल्य आ संगहि एकर उत्कृष्टताक संवहन करवाक ज्ञान सेहो करबैत अछिl आजुक वैश्विक परिप्रेक्ष्य मे अहि तरहक अमूल्य धरोहरक संरक्षण, संवर्धन वा नियमित अभ्यास में आन’ के सामाजिक-सांस्कृतिक दायित्वक प्राप्ति लेल “अछिन्जल’’ के स्थापना कायल गेल अछिl आजुक वैश्विक परिप्रेक्ष्य मे सांस्कृतिक धरोहरक संरक्षण, संवर्धन वा नियमित अभ्यास में आनि सामाजिक-सांस्कृतिक दायित्व के निर्वहन के उद्देश्य स अछिञ्जल के स्थापना वर्ष 2013 मे काएल गेल अछि। अछिञ्जल मिथिला सहित अन्य सांस्कृतिक क्षेत्रक मूर्त आ अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्द्धन, आ समाज के पुनर्प्रयोग मे आनबाक लेल काज क रहल अछि।
सर्वप्रथम मिथिलाक अमूर्त संस्कृति के संदर्भ सूची (Inventory) बनेबाक काज संस्था शुरू केलक। अहि क्रम मे आवाहन संगीत – रसनचौकी, पञ्जि प्रबंध (उतेढ़ पोथी), लोक ज्ञान परंपरा-डाक बचन, मिथिलाक विभिन्न लोक देवता व लोक नायक’क गाथा गायन, बाचिक परंपरा, सामाजिक उत्सव-सालहेस आदि परियोजना पर प्रारम्भिक काज सम्पूर्ण भ चुकल अछि आ अगिला चरणक काज चलि रहल अछि। अछिञ्जल “धरोहर शृंखला” के आयोजन करैत अछि जाहि मे कोनो एकटा अमूर्त तत्व पर केन्द्रित सेमिनार ओकर प्रस्तुति करैत अछि। अहि शृंखला मे ‘डाक बचन’ आ ‘पञ्जि प्रबंध’ पर केन्द्रित आयोजन क चुकल अछि।
प्रस्तुतिपरक कला मे लोकवाद्य रसनचौकी के साए सं बेसी प्रस्तुति, डाक वचनक 25 टा आ मैथिली नाटक “गोरखधंधा” केर 13 टा प्रस्तुति देश के विभिन्न स्थान आ प्रतिष्ठित समारोह सब मे क’ चुकल अछिl अछिञ्जल वर्ष 2016 स’ प्रत्येक वर्ष “राष्ट्रीय लोक उत्सव” मधुबनी मे करैत अछि। राष्ट्रीय लोक उत्सव मे एखन तक देशक लगभग 11 राज्यक लोक कलाक प्रस्तुति करबा चुकल अछि। नाट्य प्रस्तुति मे – वर्ष 2020 मे भारत रंग महोत्सव मे लोक नाट्य “राजा सलहेस” के प्रस्तुति (नारी उदगार संस्थानक संग); महेंद्र मलंगियाक “हाए रे हमार घरबाली” के (हिन्दी रूपान्तरण बुद्धिमती की भैंस) के प्रस्तुति 2018 मे रंग उत्सव, भोपाल मे; 2017 मे महाउर कला उत्सव, सीधी, मध्य प्रदेश मे आ 2019 मे रसजगना नाट्य उत्सव, विशाखापत्तनम क चुकल अछि। संगहि नाटक “गोरखधंधा” महाउर कला उत्सव, सीधी, मध्य प्रदेश मे 2016 मे; 2018 पाटलीपुत्र उत्सव, पटना मे का चुकल अछि। मलंगिया महोत्सव 2018 मे केवल मिथिलाक ग्रामीण महिलाक नाट्य प्रस्तुति मेघदूत दिल्ली मे क चुकल अछि। अछिञ्जल के नव नाट्य प्रस्तुति – सुनिते करैए हरान, निर्देशन-अभिषेक देवनारायनक (मूल कथा हरिमोहन झाक पाँच पत्र, नाटयांतरण-महेंद्र मलंगिया) के प्रस्तुति चेतना समिति, पटनाक उत्सव चेतना रंग उत्सव मे केलक अछि।