
नई दिल्ली। घरमे बैसि बेबस नचार बनल “कखन हरब दुख मोर” गाबि मोनकेँ हल्लुक करैत रहू। भारत सरकार तँ पहिने हाथ ठाड़ कS देलक जे अपन सुरक्षा अपनहि कएल जाउ। देशक चिकित्सीय व्यवस्था एहि महामारीक मारिकेँ सहन करबामे पूर्णतया अक्षम अछि। जँ कहीं समुदायमे पसरि गेल तँ नहि अस्पताल आ नहिएँ अस्पतालमे विस्तर आ समुचित टेस्ट कीट उपलब्ध अछि। भगवानक नाम, तंत्र मंत्रक जाप सँग एकांतवास कS स्वयं रक्षा करी।
भारत सनक बातूनी आ रोगी मानसिकता बला देशमे संकट काल सेहो उत्सव काल जकाँ देखल जाएत अछि। बहुत रास गिद्ध एकरा एकटा अवसर रुपे देखैत अछि। जेना एतय जांच लेल उपलब्ध कीटक दाम साढ़े तीन सँ चारि हजार अछि जखन की पड़ोसी गरीब बंग्लादेश देशी कीट तैयार कS अढ़ाई सए सँ तीन सए टकामे जांचक व्यवस्था कS रहल अछि।
एतय भरिसक डॉक्टरक मास्क आ ग्लब्स नहि होय मुदा अहाँ करैत रहू चरनचारण, बजबैत रहू थोपडी, झालि ढोल आ पड़ल रहू घरमे आदेशानुसार कारण आओर कए की सकब? एकटा बात ध्यान रहय, कोरोना कोनो लोकक जेबी देखिकS नहि धरि रहल छैक, ओ तँ सभ तरहक लोककेँ अपन शिकार बनौने जा रहल छैक। तेहनमे महग जांच सेहो एकटा पैघ संकट भS सकैछ आ की सरकार सभटा खरचा उठबैत छै, से जानि नहि?
हमरा सभकेँ एहन विकट स्थिति धरि पहुँचएबाक जिम्मेबार की चाइना आ की आन आन देशक प्रवासीए टा अछि? अतेक अबूझ केओ कोना भS सकैत अछि। औ जी जनैत सभटा प्रलयंकारी संकटकें बहीर अकान बनल स्थितिकेँ आओर विकराल धरि पहुँचबाक बाट तकैत रहल। ता धरि चुनाव आ सत्ताक भरुआगिरीमे लागल संकटक प्रति संवेदनहीन बनल रहलाह। आब जखन पानि माथ पर आबि गेलनि तँ अपन बेबसी लोकक सँग साझा करय आबि गेलाह। लोक करत तँ की, प्राण बचएबा डरे लोक थारी लोटा सँग अपन माथ पीटि रहल अछि।
काल्हि विश्व स्वास्थ्य संगठन लॉकडौनकेँ वायरस पर रोकथाम लेल स्थायी निदान नहि अछि, से स्पष्ट कएलक। एकरा लेल अस्पताल टेस्ट कीट दबाई आदि केवल अंतिम निदान संभव अछि। आ ताहिलेल आधुनिक भारत सरकारक चिकित्सा क्षेत्रक गम्भीरता पछिला कार्यकालकेँ देखैत अनुमान लगाओला जा सकैए।
हिनकर सूचीमे अनर्गल काजक प्राथमिकता बेसी देखल जाएत छनि मुदा देशक मूलभूत मुद्दा शिक्षा सुरक्षा चिकित्सा आदिसँ अछूते रहल अछि। खैर लॉक डाउन 21 दिनक नहि रहत, आगू कएको महीना लेल अपन करेजकेँ मजगूत कS तैयार कS ली। देशक कोनेकोनसँ बाट घाटक दिहाड़ी मजूर सभक बेहाल चित्र सभक सोझा अछि। हुनका सभकेँ भगवान रक्षा करथि। कोरोनासँ लोक मरत वा नहि ओ तँ बादक बात मुदा भूखसँ जरूर मरि जाएत जँ तत्काल एहि दिस ध्यान नहि देल गेलैक।
स्थायी निदान लेल जनवरीमे जे राज्य सरकारकेँ अस्पताल बनएबाक काज शुरू करबाक छलनि से काल्हिसँ शुरू कएल गेल। कारण दिल्ली चुनाव आ एमपीमे सत्ताक खेलाबेला सरकारक पहिल प्राथमिकता छलनि। मुदा आब अहिना बीच बीचमे साहेब जोशगर भाषणबुट्टी दैत रहत आ अपने सभ कल्लूसँ कालिया बनि बुझिकS अंतर्मनकेँ सांत्वना दैत जीवनकेँ जोतैत रही।