
नई दिल्ली। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन सर्वोच्च न्यायालय द्वारा देल गेल महत्वपूर्ण निर्णय के स्वागत कएते कहलनि जे ई फैसला संविधान के मूल भावना, सामाजिक न्याय आ विधि के शासन के सुदृढ़ करए वाला अछि। हुनकर कहना छल जे न्यायालय साफ कए देने अछि जे धर्मांतरण के बाद कोनो व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) के संवैधानिक श्रेणी मे नहि आबैत अछि, आ ओहि कारण सँ ओकरा SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत संरक्षण नहि मिल सकैत अछि। ई निर्णय संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के भावना के अनुरूप अछि, जतए स्पष्ट रूप सँ कहल गेल अछि जे केवल हिन्दू, सिख आ बौद्ध धर्म के अनुयायी सभे अनुसूचित जाति श्रेणी मे आबैत छथि।
डॉ. जैन कहलनि जे ई फैसला ओहि प्रवृत्ति पर रोक लगाबए वाला अछि जतए किछु लोक धर्मांतरण के बादो अपन पुरान जातिगत पहचान के आधार पर संवैधानिक लाभ लेबाक प्रयास करैत छथि। हुनकर अनुसार, एहि निर्णय सँ धर्मांतरण से जुड़ल गतिविधि पर कड़ा असर पड़त। ओ कहलनि जे किछु नेता एक तरफ अपन धर्म के समतावादी बताबैत छथि, मुदा दोसरा तरफ “दलित ईसाई” आ “दलित मुस्लिम” जेकाँ शब्द के प्रयोग कए आरक्षण के मांग करैत छथि, जे विरोधाभासपूर्ण अछि।
हुनकर अनुसार अनुसूचित जाति के अधिकार ऐतिहासिक सामाजिक अन्याय के दूर करबाक लेल देल गेल अछि। जँ कोनो व्यक्ति स्वेच्छा सँ धर्म परिवर्तन करैत अछि, त ओ ओहि सामाजिक संदर्भ सँ सेहो अलग भ’ जाइत अछि, जाहि आधार पर ई अधिकार देल गेल छल। डॉ. जैन ई बात सेहो स्पष्ट कएने छथि जे जँ कोनो व्यक्ति फेर सँ हिन्दू, सिख वा बौद्ध धर्म मे लौटैत छथि आ समाज द्वारा स्वीकार कएल जाइत छथि, तखने ओ फेर सँ अनुसूचित जाति के अधिकार के पात्र बनि सकैत छथि।
अंत मे डॉ. जैन कहलनि जे ई निर्णय देश मे सामाजिक समरसता, पारदर्शिता आ न्याय के स्थापना दिशा मे महत्वपूर्ण कदम अछि। विहिप द्वारा देशभर मे एहन लोक सभ के पहचान कएल जाएत जे अनुसूचित समाज के अधिकार पर अतिक्रमण कएने छथि, जाहि सँ वास्तविक लाभार्थी सभ के अधिकार सुनिश्चित कएल जा सकय।