कुमकुम झा
क्वारंटाइन पीरियड कही कि आइसोलेशन ,हिंदी में “संगरोध” ई समय अछि आत्मचिंतन के लेल ।वर्तमान में हम सब अपन घर में बैसिकय अपन समय बिता रहल छी।इ समय घर में बैसिकय दोसर के नहीं अपितु अपना आपके खोजवाक समय अछि अपना सँ साक्षात्कार करबाक समय अछि, अपना आप के परिमार्जित करबाक समय अछि आ समय के सदुपयोग करबाक समय अछि।पौराणिक कथा पढैत छलहूँ जाहि में मिथिलाक नारीक एक सँ एक चारित्रिक विशेषताक जानकारी भेल जे ओ सब कोना अपन सुकृत्य सँ उच्चतम आदर्शक स्थापना कयने छथि ।चाहे सीता शतरूपा होथि किंवा गार्गी मैत्रेयी अरुंधति होथि कि मंडन मिश्र के पत्नी भारती आ वाचस्पति मिश्र के पत्नी भामती अनेकों नाम अछि। मिथिलाक ई सब नारी रत्न जे मानसिक रूप सँ उन्नत छलीह आ अपन गरिमामय कार्य सँ नारी जातिक नाम उज्जवल कयलनि।
मैथिल संस्कृति में नारी विश्वास तथा श्रद्धाक प्रतीक रहली आजुक स्त्रीक संदर्भ में यदि गप करी तँ वर्तमान में मिथिलाक नारीक जीवन आकाश में विस्तार पाबि रहल अछि।आ अहि विस्तार पाबय के एक टा सशक्त माध्यम सोशल मीडियाके सेहो मानल जा सकैत अछि ।अहि में कोनो दू मत नहिं जे आइ ओ अवसर पाबि जी तोड़ मेहनत कय रहल छथि। आत्मविश्वास के बल पर अपन पहचान बना रहल छथि मुदा मार्ग चुनौती सँ भरल अछि। आई नारी सोशल मीडिया के उपयोग विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप फेसबुक इत्यादि सोशल मीडिया पर अपन सामाजिक और ज्ञानक दायरा सेहो बढ़ा रहल छथि किंतु आधुनिकता के नाम पर दोसर संस्कृतिक देखाउंस सेहो बहुत बढि गेल अछि ।ओ मानसिक रूप सँ दू पाटक बीच ओझरा जाइत छथि।आ ई दोसर संस्कृति के पाछां भागबाक कारणे हम सब अपन धुरि सँ छिटकि रहल छी। समय आबि गेल अछि जे हम सब आधुनिकता के नाम पर अपन स्वर्णिम इतिहास नहीं बिसरी आओर मैथिल स्त्री के ई स्मरण रहय जे सभ्यता संस्कृति, जीवन मूल्यक रक्षा के संरक्षण के दायित्व हुनके छनि ।
समयानुसारे सामाजिक चेतना आ विचारधाराक परिवर्तन होइत छैक एवं परिवर्तन चाहे सामाजिक ,सांस्कृतिक एवं वैचारिक जे होय परिवर्तन आगू बढबाक द्योतक अछि मुदा इ स्मरण सदिखन रहय जे ओहि में कोनो तरहक विकृति नहिं आबय। आजुक नारी के चेतना एवं विकास के लेल मन के मजबूत कय स्वस्थ समाजक निर्माण लेल अपनहि संघर्ष कय अपन मार्ग प्रशस्त करय पड़तनि।
