मिथिलाक लेल ऐतिहासिक दिन, आब लोक विज्ञान पढताह अपन मायक भाषा मे

नई दिल्ली। भारत सरकार जहिया सं नई शिक्षा नीति अनलक, ओकर बाद सं बहुत रास क्षेत्रीय भाषा सभ मे काज भ रहल अछि। मैथिली कें संविधानक अष्टम सूची मे मान्यता त करीब दू दशक पहिने भेटि गेलै, मुदा शुक्र दिन मिथिला आ मैथिली लेल ऐतिहासिक रहल। भारत सरकार के विज्ञान आ प्रौद्योगिकी मंत्रालय एकटा बडका डेग उठोलक। आब लोक अपन मायक बोली मैथिली मे विज्ञान पढताह। नेना-भुटका कें सीखोताह।

केंद्रीय विज्ञान आ प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुख्य लेखा नियंत्रक अखिलेश झा जनतब देलन्हि जे मैथिली बजनिहार लेल आब सहज आ सरल भाषा मे विज्ञानक पोथी प्रकाशित होयत। संगहि संग पत्रिका, ब्लाॅग , टीवी-रेडियो कार्यक्रम सेहो बनत। एकरा लेल विज्ञान प्रसार जे बीडा उठोलक ओ स्वागतयोग्य अछि। मिथिले टा नहि, बल्कि देश आ विदेश मे रहनिहार मैथिलभाषिक लेल आई एकटा ऐतिहासिक दिन अछि। जहन केंद्रीय विज्ञान आ प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत स्वायतशासी संस्था विज्ञान प्रसार ई निर्णय केलक। श्री अखिलेश झा कहलाह जे एहि सभक लेल विज्ञान प्रसार के निदेशक डाॅ नकुल पराशर जी बधाई के पात्र छथि।

श्री अखिलेश झा प्रस्ताव देलाह जे विज्ञान प्रसार दिस सं जे पत्रिका प्रकाशित होयत ओकर नाम विज्ञान रत्नाकर राखल जाय। श्री झा वर्तमान मे केंद्रीय विज्ञान आ प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुख्य लेखा नियंत्रक कें पद पर कार्यरत छथि। ओ शुक्र दिन राजधानी कें पृथ्वी भवन मे विज्ञान प्रसार के मैथिली कोर कमिटी कें पहिल बैसार कें अध्यक्षता कय रहल छलाह। ओ बजलाह जे मिथिला मेधा आ विज्ञानक धरती रहल अछि। एतुका दर्शन दर्शन विज्ञान आधारित अछि। ताहिं आई हमर आ सभ मैथिलभाषी कें ई जिम्मेदारी छन्हि जे ओ अपन आबय वाला पीढी कें अप्पन भाषा मे बेहतर आ आधुनिक सामग्री उपलब्ध कराबथि।

एहि बैसार कें सबोधित करैत विज्ञान प्रसार के निदेशक डाॅ नकुल पराशर कहलाह जे हम कतेको भाषा मे विज्ञान कें लोकप्रिय बनेाबाक काज कय रहल छी। हमरा लेल आई बडड खुशीक गप्प अछि जे हम जगतजननी जानकीक प्रेरणा सं ई काज कय रहल छी। आब हम मैथिली मे ई प्रयास कय रहल छी। सभक सहयोग सं हमर सभक प्रयास अपन लक्ष्य कें हासिल करत। डाॅ नकुल पराशर कहलाह जे जदि सभक बेहतर संग आ समन्वय रहल त विज्ञानक दुनियाक गप्प लोक मैथिली मे देखताह, पढताह आ सुनताह। ओ जनतब देलाह जे विज्ञान प्रसारक योजना के अनुसार, विज्ञान तकनीक आ नवाचार पर केन्द्रित न्यूजलेटरक प्रकाशन,  मौलिक रचना सं समृद्ध पोथीक प्रकाशन, सोशल मीडिया पर मैथिली मे विज्ञान के कार्यक्रम, मैथिली मे विज्ञान पर आधारित ब्लॉग लेखन, लघु फिल्म, वेब सिरीजक निर्माण,  इंडिया साइंस वायर पर उपलब्ध विज्ञान सामग्री कें मैथिली मे अनुवाद आओर विज्ञान प्रसार मे उपलब्ध  खिलौना वा किट्सक मैथिली मे रूपान्तरण आदि प्रस्तावित अछि।

बैसार मे विज्ञान प्रसार के कपिल त्रिपाठी, मानवर्धन कंठ आ आकाशवाणी के दिलीप झा कहलाज जे हमसभ मिलिकय सभलोक के वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करबा लेल समर्पित छी। एखन धरि विज्ञान प्रसार अंग्रेजी, हिंदी आ उर्दू के अलावा बांग्ला, तमिल एवं मराठी भाषा मे साइंस कम्युनिकेशन, पोपुलराइजेशन आ आउटरीच के काज कें आगू बढोलक। एहि क्रम के आगू बढबैत मैथिली मे सेहो विज्ञान प्रसार कें निर्णय लेल गेल अछि। 5 फरवरी, 2021 कें पहिल कोर समिति कें बैसार मे डाॅ प्रकाश झा, रोशन कुमार झा, सुभाष चन्द्र, संजीव सिन्हा, अशोक प्रियदर्शी, कणु प्रिया आ पीएन सिंह उपस्थित रहलाह।

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