निवेशक भरोसाक आधार बनत भारतक विवाद निपटान प्रणाली: CJI सूर्यकांत

नई दिल्ली। भारतक मुख्य न्यायाधीश (CJI) Surya Kant कहलनि कि देशक विवाद निपटान प्रणालीक विश्वसनीयता आब निवेशक सभक लेल भारत के एक भरोसेमंद निवेश गंतव्य के रूप में आंकय में महत्वपूर्ण भूमिका निभायत।

नई दिल्ली में आयोजित “Arbitration in the Era of Globalization–Legal Technology, Economic Development & Cross-Border Disputes” विषय पर आयोजित आईसीए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनक पांचम संस्करणक उद्घाटन सत्र के संबोधित करत हुनका कहलनि कि वैश्वीकरण केवल पूंजी के प्रवाह पर निर्भर नहि रहैत अछि, बल्कि स्थिर अपेक्षा पर सेहो आधारित होइत अछि। मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) एहि स्थिरता के सुनिश्चित करैत अछि, जाहि सँ निवेशक सभक भरोसा बढ़ैत अछि, व्यावसायिक साझेदारी मजबूत होइत अछि आ मतभेद कखनो व्यवधान में नहि बदलैत अछि।

सीजेआई कहलनि कि भारत में संस्थागत मध्यस्थता के दायरा बढ़ेबाक, पेशेवर क्षमता के मजबूत करबाक आ वैश्विक मानक संग तालमेल बैठेबाक जरूरत अछि। खास कए सार्वजनिक क्षेत्रक उपक्रम आ पैघ व्यावसायिक संस्था सभ के संस्थागत नियम के तहत मध्यस्थता अपनाबय लेल प्रोत्साहित कएल जाए के चाही।

हुनका अनुसार, संस्थागत मध्यस्थता वकील सभ आ मध्यस्थता पैनल दुनू में विशेषज्ञता विकसित करय में सहायक अछि। देशभर में एहि प्रकारक ढांचा आ क्षमता के विस्तार भारत के वैश्विक मध्यस्थता केंद्र बनाबय में मदद करत।

एहि अवसर पर दिल्लीक उपराज्यपाल Taranjit Singh Sandhu कहलनि कि भारत जखन वैश्विक साझेदारी के मजबूत कए रहल अछि आ विकास लक्ष्य दिस अग्रसर अछि, तखन व्यापार लेल एक नियम-आधारित आ पूर्वानुमेय वातावरण तैयार करय में मध्यस्थता प्रणाली के सुदृढ़ करब अत्यंत जरूरी अछि। हुनका अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी होयबाक कारण दिल्ली के मध्यस्थता आ कानूनी सेवा के वैश्विक केंद्र बनबाक स्वाभाविक अवसर प्राप्त अछि।

आईसीए के अध्यक्ष आ खैतान एंड कंपनी के वरिष्ठ भागीदार N. G. Khaitan कहलनि कि भारत आज विश्व में व्यापार लेल सबसे सुरक्षित स्थान सभ में एक अछि। आब समय आबि गेल अछि कि संस्थागत मध्यस्थता के व्यापक स्तर पर बढ़ावा देल जाए। हुनका जानकारी देलनि कि भारत में लगभग 20 लाख वकील छथि आ हर वर्ष करीब 70 हजार नव वकील एहि पेशा में प्रवेश करैत छथि।

आईसीए के महानिदेशक Arun Chawla कहलनि कि वैश्विक व्यापार में बढ़ैत जुड़ाव संग भू-राजनीतिक बदलाव, नियामकीय विविधता आ आर्थिक अनिश्चितता सेहो बढ़ि रहल अछि। एहन परिस्थिति में भारत जेकाँ उभरैत देश के वैश्विक व्यवस्था के नव नियम बनाबय में सक्रिय भूमिका निभाबय के जरूरत अछि, जाहि में लाभ संग निश्चितता, निष्पक्षता आ कानून के शासन के महत्व देल जाए।

हुनका कहलनि कि आज मध्यस्थता आ सुलह वैश्विक स्तर पर निवेशक सुरक्षा आ भरोसेमंद विवाद समाधान के प्रमुख आधार बनि चुकल अछि।

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