जखन एक्टर के बेस्ट एक्ट्रेस आ एक्ट्रेस के भेटल बेस्ट एक्टर अवार्ड

 

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा मे कखनो-कखनो एहन प्रयोग होइत अछि, जे समय सँ आगू चलैत अछि। 1996 मे आयल सिनेमा ‘दायरा’ एहने फिल्म छल, जे जेंडर, पहचान आ प्रेम के पारंपरिक परिभाषा के चुनौती देलक। एहि फिल्म नहि सिर्फ दर्शक के सोच बदलबाक प्रयास केलक, बल्कि अवॉर्ड्स के मंच पर सेहो इतिहास लिखलक।

अमोल पालेकर द्वारा निर्देशित ‘दायरा’ एक प्रयोगधर्मी आ संवेदनशील सिनेमा के उदाहरण अछि। फिल्म मे समाजक
जेंडर आइडेंटिटी, सामाजिक बंधन आ मानवीय रिश्ताक जटिलता सन मुद्दा उठाओल गेल अछि, जाहि पर समाज प्राय: चुप्पी साधि लइत अछि ।

अभिनय जे बनल इतिहास
फिल्म के सबस आश्चर्यक बात रहल—अवॉर्ड्स मे भ’ गेल अद्भुत बदलाव।
* निर्मल पांडे, जे फिल्म में ट्रांसवेस्टाइट डांसर के भूमिका निभौलनि, हुनका फ्रांस के Valenciennes Film Festival में “बेस्ट एक्ट्रेस” के अवॉर्ड देल गेल।
* सोनाली कुलकर्णी, जे पुरुष के किरदार में नजर अयली, हुनका “बेस्ट एक्टर” के सम्मान भेटल।
अवार्ड के ई आश्चर्यजनक अदला-बदली सिर्फ संयोग नहि छल, ई फिल्म के मूल विचार के सशक्त प्रतीक छल, जे जेंडर के सीमाके तोड़ैत अछि।

निर्मल पांडे अपन किरदार मे एतेक सहजता सँ रमि गेल छलाह जे दर्शक अभिनेता के बिसरि क’ किरदार के महसूस करैत अछि। ओनाहिए, सोनाली कुलकर्णी अपन अभिनय मे गहराई, आंतरिक संघर्ष आ भावनात्मक द्वंद्व के सजीव बना देने छलीह। दुनू कलाकार के केमिस्ट्री फिल्म के भावनात्मक ताकत बनैत अछि।

सम्मान आ वैश्विक पहचान
‘दायरा’ के 44म नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में स्पेशल जूरी अवॉर्ड भेटल।
एहि फिल्म के अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में सेहो सराहना भेटल, जे एकर वैश्विक महत्व के द्योतक अछि।

‘दायरा’ 12 सितंबर 1996 के रिलीज भेल छल, मुदा आइयो ई ओतबे प्रासंगिक अछि। ई फिल्म अमोल पालेकर के “सेक्सुअलिटी ट्रिलॉजी” के पहिल कड़ी मानल जाइत अछि, जाहि के बाद ‘अनाहत’ (2003) आ ‘थांग’ (2006) आयल छल।

निर्मल पांडे के ई अभिनय हुनकर करियर के सबस यादगार एक्टिंग अछि। 2010 मे हुनकर देहांत भ’ गेल, मुदा हुनकर अभिनय आइयो जीवंत अछि।

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