
रामबाबू सिंह
मधुबनी। संवैधानिक भाषा मैथिलीकेँ हिंदीक उपभाषा बला खबरिमे भारत सरकारक बंगाली शिक्षामंत्री डॉ शुभाष सरकार बेस चर्चामे रहल। फेर आरम्भ भेल तर्क कुतर्क अनर्गल विमर्श आ ताकल गेल पुरान साक्ष्य ओकर लाज बचएबाक लेल! दरिभंगाक सांसद आदरणीय गोपाल झा जी द्वारा संसदमे सबाल जबाबक एकटा अंश सेहो सोसल साइट पर साटल गेल। आ ताहिमे स्पष्टतः पूर्ववती सरकार कोंग्रेसकेँ कटघरामे ठाड़ कएल देखाओल गेल!
ओहि जबाबक अंतिम पैरा देखल गेल जाहिसँ स्पष्ट भS रहल छल जे 24 अप्रैल 2014 केर एकटा बैसारमे एहन बात कहल गेल छल! एक तँ कक्षा पहिलसँ आठ धरिक पढाई नहि होयब एकर मुख्य कारण आ दोसर ओ हिंदीक उपभाषा!
मानल प्राथमिक शिक्षामे पढ़ाई एकटा महत्वपूर्ण कारण अछि मुदा एकर प्रयोजन एखनहि किएक भेलैक! दोसर एकटा संवैधानिक भाषा की कोनो आन भाषाक उपभाषा संभव छैक! आ की शिक्षा राज्यमंत्रीकेँ अतबहु ज्ञान नहि छनि आ की कमजोरहाक लुगाई सबहक भौजाई बला बात छैक!
एहि सभसँ इतर 20 अप्रैल 2014 देशमे आम चुनावक आखिर दौर छल। जखन देशमे आम चुनाव चलि रहल होय तँ सहजहि चुनाव आचार संहिता सेहो लागू रहल हेतैक! चुनावक कार्यक्रम 7 अप्रैल सँ 12 मई धरि देशमे 9 चरणमे छल। जाहिमे 20 अप्रैल 2014 दिन आखिरी 9 वाँ चरण केर मतदान छल।
सबाल ई अछि जखन देशमे आम चुनाव भS रहल छल। तँ मंत्रिमंडल सभ सेहो भंग भेल हेतै , आचार संहिता लागू छल, तेहनमे कोंग्रेस बैसार कS सत्ते ई महत्वपूर्ण निर्णय लेने हेतैक! आ की इहो एकटा फर्जी खबरिक कॉपी साटल गेल अछि! तथ्य संगत स्पष्टीकरण केर अपेक्षा समस्त मिथिला चाहैत अछि। 20 अप्रैल 2014 मे कोंग्रेस द्वारा लेल गेल ई निर्णयक कॉपी आरटीआईसँ बहराओल जाए! कतेक ई सत्त किंवा फर्जी अछि एकर साक्ष्य सहित सोझा राखल जाए!
भले किछुओ हो परञ्च एकटा शिक्षा राज्यमंत्रीक अज्ञानता पर चादरि ओढाएब किन्नहुँ उचित नहि!
(साभार)