शिक्षक दिवस विशेष: चिंतन, नीतिगत परिवर्तन आ कक्षाक मूल पुकार

कुमकुम झा

शिक्षक दिवस केवल औपचारिक उत्सव, पुष्पगुच्छक आदान-प्रदान अथवा मंच सँ कएल जाएवला प्रशंसाक दिन नहि अछि। ई भारतीय समाज आ शासन-व्यवस्थाक लेल शिक्षाक आत्मा, ओकर जमीनी स्थिति आ शिक्षकक वास्तविक दशा पर गंभीर आत्ममंथन करबाक पावन अवसर अछि। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनक उदात्त विचारक सार्थकता एहि बातमे अछि जे हम शिक्षाक मूल केंद्र—कक्षा आ शिक्षक—क जीवंतता केँ सुरक्षित राखी।

परिवर्तनक अनिवार्यता आ नीतिगत नवाचार

परिवर्तन प्रकृतिक शाश्वत नियम अछि आ प्रगतिक अनिवार्य संकेत सेहो। 21वीं शताब्दीक वैश्विक चुनौती, तकनीकी क्रांति आ बदलैत सामाजिक आवश्यकताक परिप्रेक्ष्यमे शिक्षा नीतिमे सुधार आ नवाचार अत्यंत आवश्यक कदम अछि। जड़ता कहियो कोनो राष्ट्र वा समाजक निर्माण नहि कऽ सकैत अछि।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति सहित समय-समय पर आबि रहल नीतिगत दस्तावेजसभमे भविष्य केँ बेहतर बनयबाक, कौशल विकास, समग्र मूल्यांकन आ बहुविषयक दृष्टिकोणक सुंदर परिकल्पना समाहित अछि। नीति-निर्माताक दृष्टि आ सुधारक उद्देश्य पर संदेह करबाक कोनो औचित्य नहि अछि, कारण शिक्षा-व्यवस्था केँ समयक गति संग कदम मिला कऽ चलनाइ आवश्यक अछि।

मुदा कोनो नीति कागज पर जतेक भव्य आ प्रगतिशील देखाइत अछि, ओकर वास्तविक सफलता एहि बात पर निर्भर करैत अछि जे जमीन पर ओकर क्रियान्वयन के करैत अछि आ ओकरा लेल संसाधन आ समय कतेक उपलब्ध अछि।

आइ शिक्षा जगतक सबसँ मार्मिक आ विचारणीय विरोधाभास ई अछि जे नीति जतबा ऊंच लक्ष्य निर्धारित कऽ रहल अछि, जमीनी स्तर पर शिक्षकक कार्यक्षेत्र ततबे गैर-शैक्षणिक औपचारिकतामे सिमटैत जा रहल अछि।

व्यवस्थागत अपेक्षाक केंद्रमे ई बात बिसरा जाइत अछि जे शिक्षकक मानसिक ऊर्जा असीमित नहि होइत अछि। आइ एक शिक्षक केँ अध्यापनक संग-संग नित्य नव डेटा संकलन, ऑनलाइन पोर्टल पर दैनिक प्रविष्टि, विभिन्न सरकारी योजनाक भौतिक आ डिजिटल क्रियान्वयन, सर्वेक्षण आ कागजी प्रतिवेदनक बहुस्तरीय प्रक्रियामे उलझा देल गेल अछि।

एकर परिणाम ई भऽ रहल अछि जे जाहि मूल उद्देश्य लेल शिक्षकक चयन होइत अछि—कक्षामे प्रत्यक्ष पठन-पाठन, विद्यार्थीक बौद्धिक परिष्कार आ चारित्रिक संवर्धन—ओहि प्राथमिक कार्यक महत्व धीरे-धीरे कम होइत जा रहल अछि।

कक्षा सँ शिक्षकक दूरी गंभीर चिंता

शिक्षक केवल प्रशासनिक कर्मचारी नहि, बल्कि एक चेतनामय संवाहक छथि, जे मानवीय संवेदना आ जिज्ञासाक निर्माण करैत छथि।

जखन शिक्षकक अधिकांश समय ब्लैकबोर्ड, चॉक आ बच्चासभक आँखिमे देखाइत जिज्ञासासँ हटि कऽ फाइल, मोबाइल एप्लिकेशन आ प्रशासनिक दायित्वमे बीतय लागय, तऽ ई केवल कोनो एक शिक्षकक व्यक्तिगत समस्या नहि रहि जाइत अछि, बल्कि संपूर्ण शिक्षा-व्यवस्थाक लेल खतरेक घंटी अछि।

प्रत्येक नीति, प्रत्येक सरकारी योजना आ प्रत्येक नवाचारक केंद्रमे अंतिम पाँतिमे बैसल ओ नन्हा बच्चा अछि। ओहि बच्चाक जीवनमे सकारात्मक प्रकाश अनबाक सबसे महत्वपूर्ण माध्यम शिक्षक छथि।

जँ ओहि माध्यम केँ प्रशासनिक बोझक नीचाँ थका देल जाएत, तऽ बेहतरीनसँ बेहतरीन नीति विद्यालयक रजिस्टर आ वेबसाइटक फाइलमे तऽ जीवित रहत, मुदा कक्षाक आत्मा निस्तेज भऽ जाएत।

शिक्षामे सुधारक सदिखन स्वागत होयबाक चाही, मुदा सुधारक स्वरूप एहन नहि हो जे शिक्षकक रचनात्मक स्वतंत्रता आ समय केँ छीनि लिअय। एहि दिशा मे स्वस्थ विमर्श आ संतुलनक नितांत आवश्यकता अछि।

प्रशासनिक प्रक्रियाक विकेंद्रीकरण

डेटा एंट्री, योजनाक औपचारिक रिकॉर्ड आ तकनीकी औपचारिकताक लेल समर्पित प्रशासनिक अथवा तकनीकी कर्मचारीक व्यवस्था होयबाक चाही, जाहिसँ शिक्षकक मूल कार्य ज्ञान बाँटनाइ, शिक्षण आ शोधपरक अध्यापन धरि सीमित रहय।

शिक्षकक अध्यापन समय सुरक्षित रहय

कोनो नव नीतिगत नियम अथवा योजना लागू करयसँ पहिने ई सुनिश्चित कएल जाए जे एकर कारण शिक्षकक दैनिक अध्यापन समयमे कटौती नहि हो।

नीति निर्माणसँ लऽ कऽ जमीनी स्तर पर ओकर क्रियान्वयन धरि प्राथमिक आ माध्यमिक शिक्षकक व्यावहारिक अनुभव केँ उचित स्थान देल जाए। कारण शिक्षा-व्यवस्थाक वास्तविक चुनौती केँ सबसँ नीक ढंगसँ ओ शिक्षक बुझि सकैत छथि, जे प्रतिदिन कक्षामे बच्चासभक संग संवाद करैत छथि।

नवाचार हो, मुदा कक्षाक धड़कन नहि रुकय

नवाचार आ आधुनिकताक स्वागत खुलल हृदय सँ होयबाक चाही, मुदा एहि शर्त पर जे ओ कक्षाक स्वाभाविक धड़कन केँ बाधित नहि करय।

जाधरि हम शिक्षक केँ हुनकर मूल सम्मान आ दायित्व—पूरा तन्मयता, शांति आ गरिमाक संग पढ़ेबाक स्वतंत्रता—वापस नहि देब, ताधरि शिक्षाक समग्र विकास कागजक पन्ना धरि सीमित रहि सकैत अछि।

शिक्षक दिवसक सच्चा संदेश यही अछि जे शिक्षक केँ शिक्षक बनल रहय दिअ, जाहिसँ हमर कक्षाक संवाद मुखर रहय आ राष्ट्रक बौद्धिक नींव निरंतर मजबूत होइत रहय।

( लेखिका नवयुग स्कूल, नई दिल्लीमे शिक्षिका छथि।)

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