पटना महावीर मंदिरक लड्डूक कथा

Patna : पटना महावीर मंदिरक एकटा अलग पहचान अछि—एतयक प्रसिद्ध नैवेद्यम लड्डू। आइ ई लड्डू मंदिरसँ एतेक जुड़ि गेल अछि जेना तिरुपति बालाजीमे भेटैत प्रसाद। मुदा की अहाँ जनैत छी जे 1992-93 सँ पहिने महावीर मंदिरमे एकटा दोसर खास तरहक लड्डू सेहो बिकैत छल?

पहिने पटना महावीर मंदिरमे सूजी आ बेसनक घीवाला लड्डू प्रसादक रूपमे चढ़ाओल जाइत छल। ई लड्डू मंदिरक नियंत्रणमे लागत मूल्य पर बिकैत छल आ एकर सुगंध आ स्वाद बहुत खास मानल जाइत छल। मंदिरक पश्चिमी देवालिसँ सटल न्यू मार्केट दिस जाएवाला सड़कक कातमे एकर दोकान छल। आइयो ओ दोकान अछि, मुदा नैवेद्यम लड्डूक आगमनक बाद एकर बिक्री बहुत कम भऽ गेल अछि।

सबसँ रोचक बात ई छल जे तखन एतय ईमानदारी आ विश्वासक अनोखा उदाहरण देखबाक लेल भेटैत छल। श्रद्धालु प्रसादक दोकानपर जाइत छलाह, कतेक लड्डू चाही से कहैत छलाह, दोकानदार लड्डू दऽ दैत छलाह। श्रद्धालु पूजा-पाठ कऽ मंदिरसँ वापस अएलाक बाद ओकर पैसा चुका दैत छलाह। श्रद्धा आ विश्वासक ई परंपरा अपनामे अद्भुत छल।

आइ पटना महावीर मंदिरमे प्रति मास 100 क्विंटलसँ बेसी नैवेद्यम लड्डू बिकैत अछि। वर्ष 1992 मे किशोर कुणाल जीक देखरेखमे नैवेद्यमक बिक्री शुरू भेल छल। शुरुआतमे प्रति मास लगभग 500 किलो लड्डू बिकैत छल, मुदा बादमे श्रद्धालुक संख्या बढ़ल आ नैवेद्यमक बिक्री सेहो कतेको गुना बढ़ि गेल।

आइ महावीर मंदिरमे नैवेद्यमक रूपमे भेटनिहार ई लड्डू भक्तक अत्यंत प्रिय प्रसाद बनि गेल अछि। मुदा जँ अहाँ चाही तऽ मंदिरक लगमे आइयो लगभग 280 सँ 300 टका प्रति किलोक दरपर सूजी आ बूंदीक लड्डू भेटि जाइत अछि।

एहि लड्डूकेँ भगवानक भोग लगौने बिना खाएबाक परंपरा नहि अछि। मान्यता अछि जे पहिने ई लड्डू प्रभुक चरणमे अर्पित कएल जाए, तकर बादे प्रसादक रूपमे ग्रहण कएल जाए।

महावीर मंदिर आ एकर लड्डू—ई केवल प्रसाद नहि, बल्कि मिथिला-बिहारक श्रद्धा, परंपरा आ आस्थाक एकटा खास पहचान अछि।

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