अयोध्या। राम मंदिर में श्रद्धालुसभ द्वारा देल गेल दानक कथित दुरुपयोगकेँ लऽ उठल विवादक बीच राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा मंदिरक संपूर्ण प्रबंधन व्यवस्था में व्यापक सुधार आ पुनर्गठनक आवश्यकता पर जोर देलनि अछि। हुनकर कहब अछि जे हालक घटनाक्रम निगरानी व्यवस्था, जवाबदेही आ प्रशासनिक प्रक्रिया में मौजूद गंभीर कमजोरीकेँ उजागर कएने अछि।
नृपेंद्र मिश्रा कहलनि जे दान प्रबंधनसँ जुड़ल विवाद केवल वित्तीय अनियमितताक आरोप धरि सीमित नहि अछि, बल्कि एहि घटना मंदिरक प्रशासनिक ढाँचाक कमजोरीकेँ सेहो सामने आनने अछि। हुनक अनुसार ई विषय करोड़ों श्रद्धालुक आस्था सँ जुड़ल अछि, एहिलेल प्रबंधन प्रणालीकेँ बेसी पारदर्शी, जवाबदेह आ पेशेवर बनायब समयक मांग अछि।
हुनका कहब छल, “हम एहि संबंध में कोनो औपचारिक प्रस्ताव नहि देलहुँ अछि, मुदा सार्वजनिक रूप सँ अपन विचार जरूर रखलहुँ अछि। हमर स्पष्ट मत अछि जे संपूर्ण प्रबंधन ढाँचाक पुनर्गठन होअय आ एकरा अनुभवी पेशेवर लोकनिक हाथ में सौंपल जाए।”
दान प्रबंधन पर उठल विवाद
राम मंदिर में चढ़ावा आ दान राशि के हिसाब-किताब में कथित गड़बड़ीक आरोपक बाद ई विवाद सामने आएल। आरोप में करोड़ों रुपैयाक लेखा-जोखा में अनियमितताक बात कहल गेल अछि, हालांकि एहि दावाक आधिकारिक पुष्टि एखन धरि नहि भेल अछि।
मामला ओहि समय राजनीतिक रूप धारण कए लेलक, जखन मंदिर सँ जुड़ल एक कर्मचारीक घर सँ नकद धनराशि बरामद होबाक खबर सामने आएल। एकर बाद उत्तर प्रदेश सरकार तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठन कएलक। एसआईटी केँ दान रजिस्टर, तिजोरीक रिकॉर्ड आ सीसीटीवी फुटेजक जांचक जिम्मेदारी देल गेल अछि।
ट्रस्ट आरोपकेँ खारिज कएलक
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कोनो प्रकारक वित्तीय अनियमिततासँ इनकार कएने अछि। ट्रस्टक कहब अछि जे ओकर सभ खाता नियमित रूप सँ ऑडिट होइत अछि आ एखन धरि कोनो गड़बड़ी सामने नहि आएल अछि।
स्वयंसेवी व्यवस्था पर आधारित अछि वर्तमान प्रणाली
नृपेंद्र मिश्रा बतौलनि जे वर्तमान में मंदिरक अधिकांश संचालन एकटा औपचारिक संस्थागत ढाँचाक बजाय स्वयंसेवक-आधारित व्यवस्था पर निर्भर अछि। हुनकर अनुसार अधिकांश कर्मीक जिम्मेदारी अनौपचारिक रूप सँ तय कएल जाइत अछि। न त स्पष्ट लिखित आदेश अछि आ नहिए कार्य विभाजन आ जवाबदेही सुनिश्चित करबाक मजबूत व्यवस्था।
हुनका अनुसार बहुत रास काज परंपरागत तरीका सँ चलि रहल अछि, मुदा एतेक पैघ संस्था लेल केवल अनौपचारिक व्यवस्था पर्याप्त नहि मानल जा सकैत अछि।
1,500 सँ अधिक लोकक लेल जरूरी अछि पेशेवर प्रबंधन
मिश्राक अनुसार राम मंदिर परिसर में लगभग 1,500 लोक विभिन्न जिम्मेदारी निभा रहल छथि। एहन स्थिति में सुव्यवस्थित प्रशासनिक ढाँचा, स्पष्ट जिम्मेदारी आ प्रभावी निगरानी तंत्र अत्यंत आवश्यक अछि।
हुनका कहब अछि जे देश-विदेश सँ लाखों श्रद्धालु राम मंदिर अबैत छथि आ मंदिर केँ भारी मात्रा में दान सेहो प्राप्त होइत अछि। एहिलेल वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा, लेखा-जोखा आ प्रशासनिक प्रक्रियाकेँ संस्थागत रूप देब आवश्यक भऽ गेल अछि।
आस्था आ जवाबदेही दुनूक रक्षा जरूरी
पूर्व आईएएस अधिकारी आ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीक पूर्व प्रधान सचिव रहल नृपेंद्र मिश्रा कहलनि जे हालक विवाद ओहि व्यवस्थापर गंभीर सवाल ठाढ़ कएने अछि, जकर उद्देश्य श्रद्धालुसभक चढ़ावा आ दानक सुरक्षा सुनिश्चित करब छल।
हुनका अनुसार राम मंदिर केवल एकटा धार्मिक स्थल नहि, बल्कि करोड़ों लोकक आस्थाक केंद्र अछि। एहिलेल मंदिरक प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही आ आधुनिक प्रशासनिक मानककेँ शामिल करब जरूरी अछि।
मिश्रा कहलनि जे एसआईटी जांचक निष्कर्षक संग-संग मंदिरक प्रशासनिक संरचनाक व्यापक समीक्षा सेहो होअय, जाहिसँ भविष्य में एहन स्थिति दोबारा उत्पन्न नहि हो।
राजनीतिक आ प्रशासनिक विश्लेषक सभक मानब अछि जे नृपेंद्र मिश्रा के ई बयान राम मंदिर प्रशासन में संभावित संरचनात्मक सुधारक दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत अछि। आब सभक नजर जांच रिपोर्ट आ ओकर आधार पर होमयवला सुधारात्मक कदम पर टिकल अछि।
