
मुंबई: राष्ट्रीय डेंगू दिवस (16 मई) सं पहिने सार्वजनिक स्वास्थ्यक क्षेत्रमे एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आएल अछि। घरेलू कीटनाशकक सुरक्षित उपयोगके बढ़ावा देनिहार गैर-लाभकारी संस्था होम इन्सेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (हिका) द्वारा जारी अध्ययनमे कहल गेल अछि जे गैर-कानूनी तरीका सं बनल मच्छर भगाबयवाली नकली अगरबत्ती डेंगू आ मलेरिया जेकाँ मच्छरजनित बीमारी सं सेहो बेसी खतरनाक साबित भ’ सकैत अछि।
ई शोध बाजार अनुसंधान कंपनी कंटार द्वारा कएल गेल, जाहिमे देशक 12 शहरक 1,264 परिवार आ 405 डॉक्टर (पल्मोनोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, सामान्य चिकित्सक आ स्त्री रोग विशेषज्ञ) शामिल छलाह।
रिपोर्टक अनुसार, सर्वेक्षणमे शामिल 70 प्रतिशत डॉक्टरक कहब अछि जे गैर-कानूनी अगरबत्ती सांस संबंधी गंभीर बीमारीक कारण बनि सकैत अछि, जखन कि 67 प्रतिशत डॉक्टर एकरा सिगरेट धुआँक बराबर स्वास्थ्य जोखिम मानैत छथि।
चौंकाबयवाली बात ई अछि जे 59 प्रतिशत भारतीय परिवार एहि तरहक उत्पादक उपयोग करैत छथि, आ आधा परिवार तीन वर्ष सं बेसी समय सं प्रतिदिन एकर उपयोग क’ रहल छथि।
राष्ट्रीय डेंगू दिवस सं पहिने रिपोर्ट जारी, फेफड़ा आ सांसक बीमारीक बढ़ल खतरा
विशेषज्ञ सभक अनुसार भारतमे मच्छर भगाबयवाली अगरबत्तीक करीब 2,000 करोड़ रुपयाक बाजार अछि, जाहिमे लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा गैर-कानूनी वा अनियमित उत्पादक कब्जामे अछि। एहि उत्पाद पर सरकारक मंजूरी, सेंट्रल इन्सेक्टिसाइड्स रजिस्ट्रेशन (CIR) नंबर अथवा इस्तेमाल भेल रसायनक स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहि रहैत अछि।
ई उत्पाद बाजारमे ‘कम्फर्ट’, ‘स्लीपवेल’, ‘रिलैक्स’, ‘हाई वोल्टेज’, ‘हैप्पी नाइट’ आ ‘डेंगू किलर’ सन नामसं बेचल जाइत अछि, मुदा अधिकांशमे जरूरी नियामकीय स्वीकृति नहि रहैत अछि।
हिकाक सचिव आ निदेशक जयंत देशपांडे कहलनि जे ग्राहकसभकेँ सिर्फ ओहि उत्पादक उपयोग करबाक चाही जाहि पर स्पष्ट रूप सं CIR रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित हो। बिना प्रमाणित उत्पाद स्वास्थ्य लेल गंभीर खतरा बनि सकैत अछि।
डॉक्टर सभक मुताबिक, लगातार एहि अगरबत्तीकेँ उपयोग करबासँ घरक लोकनिक स्वास्थ्य खर्च बढ़ि रहल अछि। 84 प्रतिशत डॉक्टर मानैत छथि जे एकर कारण इलाज पर अतिरिक्त खर्च होइत अछि।
एस.एल. रहेजा हॉस्पिटल, माहिमक क्रिटिकल केयर निदेशक डॉ. संजीत ससीधरन कहलनि जे एहि अगरबत्तीमे पाइरेथ्रॉइड, ऑर्गेनोफॉस्फेट आ भारी धातु जेकाँ खतरनाक रसायन हो’ सकैत अछि, जे फेफड़ाक समस्या, लगातार खाँसी, घरघराहट आ सांस लेबामे कठिनाई पैदा क’ सकैत अछि।
ओ कहलनि जे बच्चा, बुजुर्ग, अस्थमा आ सीओपीडी मरीज सभ लेल ई सभसँ बेसी खतरनाक अछि।
रिपोर्टमे ईहो सामने आएल जे 55 प्रतिशत डॉक्टर मानैत छथि जे लोकसभमे सुरक्षित आ सरकार द्वारा स्वीकृत विकल्पक जानकारीक भारी कमी अछि, जाहि कारण लोक आसानीसँ उपलब्ध नकली उत्पाद पर निर्भर छथि।
विशेषज्ञ सभ उपभोक्तासँ अपील कएलनि अछि जे मच्छरसं बचाव लेल केवल प्रमाणित आ सुरक्षित उत्पादक उपयोग करू आ गैर-कानूनी उत्पाद बेचनिहार पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कएल जाए।