माइग्रेन स भ’ सकैत अछि मानसिक स्वास्थ्य विकार

 

नई दिल्ली। माइग्रेन एहन रोग अछि जकर असर आदमीक मानसिक स्वास्थ्य पर सेहो पड़ैत अछि। माइग्रेन सँ पीड़ित व्यक्ति मे एंग्जायटी आ डिप्रेशन होएबाक संभावना 5 गुना बेसी रहैत अछि। माइग्रेन सँ होए वाला माथदर्द एंग्जायटी आ डिप्रेशन के कारण बनि सकैत अछि। एहिसँ बचबाक लेल जीवनशैली मे बदलाव जरूरी अछि।

माइग्रेन आ मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहिंर संबंध अछि। मानसिक तनाव अक्सर माइग्रेनके कारण बनि सकैत अछि। जे व्यक्ति माइग्रेन सँ पीड़ित होइत छथि, हुनका मे एंग्जायटी आ डिप्रेशन बढ़बाक संभावना बेसी होइत अछि। एना ई दुनू एक-दोसर के प्रभावित करैत अछि।

माइग्रेन मात्र माथदर्द नहि, बल्कि एकटा जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थिति अछि जे आदमी के कार्यक्षमता के गंभीर रूप सँ प्रभावित करैत अछि। एकर असरि सिर्फ माथदर्द धरि सीमित नहि रहैत अछि, अपितु मानसिक तनाव, एकाग्रता मे कमी के अलावा ककरो सँ भेंट-बात करबाक इच्छा खत्म क’ दैत अछि। जाहि स’ मानसिक स्वास्थ्य पर खराब असरि पड़ैत अछि।

थकान, अनिद्रा, अभूख, एकाग्रता में कमी अछि प्रमुख लक्षण

सामान्य माइग्रेन के तुलना में क्रोनिक माइग्रेन सँ पीड़ित व्यक्ति के स्थिति बेसी जटिल होइत अछि। एहिमे महीना में 15 दिन वा अहि स’ बेसी दिन धरि माथदर्द रहैत अछि, आ बेसी काल माइग्रेन बनल रहैत अछि। क्रोनिक माइग्रेन बेर-बेर आ लंबा समय धरि होए वाला माइग्रेन अछि। एकर संबंध पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) सँ सेहो जोड़ल गेल अछि। क्रोनिक माइग्रेन सँ पीड़ित व्यक्ति मे मानसिक तनाव आ डर बेसी महसूस भ’ सकैत छैक।

मानसिक स्थिति के असर शरीर पर सेहो पड़ैत अछि। मानसिक तनाव बढ़ला सँ माथदर्द बढ़ैत अछि, आ माथदर्द बढ़ला सँ मानसिक तनाव सेहो बढ़ैत अछि। एहि तरहे ई दुष्चक्र बनि जाइत अछि। एहिसँ बचबाक लेल तनाव के कम करब बहुत जरूरी अछि।

एहि स’ बचबाक लेल जीवनशैली मे बदलाव सबस आवश्यक अछि।
प्रमुख उपाय अछि :
* हेल्दी आ संतुलित भोजन
* नियमित व्यायाम
* राति में जल्दी सुतनाइ आ भोर में जल्दी उठनाइ
* योग आ ध्यान
* साँस संबंधी व्यायाम (अनुलोम-विलोम आदि)
उपरोक्त उपाय स’ माइग्रेन आ मानसिक स्वास्थ्य सँ जुड़ल समस्या सँ बचल जा सकैत अछि।

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